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शीर्षक - भूलने लगे हो

शीर्षक - भूलने लगे हो उदासी चेहरे पर छानी लगी शायद मैं भूलने लगा हूं तुम्हें या भूलने लगे हो तुम हमें उतार चढ़ाव सी आने लगी है खुशियाँ भी अब गुमसुम सी हैं हर बात में कुछ कमी सी है तन्हाई अब साथी लगती है हर शाम अधूरी सी लगती है नज़रों में धुंधलापन सा है हर सपना अब बेजान सा है दिल की दीवारें चुप हैं सारी खामोशी बन गई है हमारी सवारी लब खामोश, पर दिल चीखता है तेरी यादों में हर पल भीगता है तेरे बिना य…

शीर्षक - दास्तां चांद की

शीर्षक - दास्तां चांद की ऐ चांद, मै‌ तुझे क्यों देखता हूं ये प्रश्न तुम्हीं से पूछता हूं? क्या तुम सुन्दर हो‌ इसलिए? क्या तुम‌ शीतल हो इसलिए? क्या तुम चमकीले हो इसलिए? आखिर बता ही दो किसलिए? एकटकटकी नजरों से वो, हमें देखता रहा ! फिर कहा , तुम सुन्दर हो‌ इसलिए। तुम अच्छे हो इसलिए। तुम गुणवत्तापूर्ण हो इसलिए। है कौन जो यहां, किसी को अच्छा कहे। है कोन‌ यहा ,किसी की तारीफ करें । लोगों‌ को चांद‌ में द…

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