हर चेहरे की एक कहानी हैं
by Mohini Sharma, India. First place in the Writory International Poetry Contest, January 2026, scored 98 out of 100.
हर चेहरे की एक कहानी है, हर चेहरे की एक कहानी है, कुछ छुप गई किताबों में, बाकी सब ज़ुबानी है। हर चेहरे की एक कहानी है। शख़्स जो ये मेरे पास बैठा है, हाथों में हथियार लिए, रोज़ी-रोटी के औज़ार लिए— आज आख़िरी दिन है, इसे बच्चों के ख़्वाबों की फ़ीस चुकानी है… वो जो भीड़ में उलझा साड़ी का पल्लू, एक-एक कर ज़िंदगी की गिरहें खोल रहा है, ख़्वाब मर गए सब सिंदूर में दबकर, चेहरे का ये फ़्रीक़ापन बोल रहा है… यहाँ हिजाब में मुस्कुराता एक चेहरा सुनाई दे रहा है, पलकों पर थमा अश्क़ का एक क़तरा भी दिखाई दे रहा है, आँखों में मोहब्बत बसी है उसकी, लेकिन बातों में मज़बूरी का ख़ौफ़ भी नज़र आ रहा है… उस चूड़िवाली के कंधे पर कुछ लाल निशान हैं शायद, उस बेवक़्त के लिए उसका पति भगवान है शायद, जो देखी बचपन से वही कड़वी रीत अपनाई होगी, दाल में नमक कम था ज़रा-सा— बस इसी बात पर रातभर कराहती होगी… कोई टूटे ख़्वाब जोड़ रहा है, कोई मंज़िल के पीछे दौड़ रहा है… कोई अल्फ़ाज़ों से घायल है, कोई अपने ही धुन में मशग़ूल है… ट्रेन की इस बोगी में यूँ तो अनजान थे सब चेहरे, पर शोर बहुत था। जो देखा ग़ौर से, कुछ सुना, समझा— तो जाना, हर चेहरे की एक कहानी है, कुछ छुप गई किताबों में, बाकी सब ज़ुबानी है। इसलिए… जो मिले कभी कहीं किसी से, मुस्कराकर मिलना— क्योंकि हर चेहरे के पीछे एक परेशानी है। हर चेहरे की एक कहानी है। — मुन्नू (मोहिनी)
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