शहर बनारस !
by Abhishek Yadav, India. Third place in the Writory International Poetry Contest, October 2025, scored 93 out of 100.
शहर बनारस ! कभी आओ गली बनारस में जहां शिव रमते है आसन में, शिव की नगरी अदभुत लीला यहां प्रेम मोह का संगम मेला, मेरे प्राण बसे बनारस में जहां कण कण गूजे शिव अभिनशी कभी आओ गली बनारस में...... मणिकर्णिका जो घाट है पावन जहां जीवन का अंतिम अंत सुहावन, काशी की वाश पावनता लाती अंतिम यात्रा, यहां मोक्ष दिलाती, सांझ सवेरे यहां मंत्र है गूंजे कोना कोना बस शिव को पूजे, घंटी, नाद, जहां ढोल सुनाते यहां ठुमरी, बिरहा, कजरी गाते, हुई रचना यहां अमर ग्रंथों की कलम उठी जहां महासंतो की, जिसने भी छुआ स्वर्ण हुआ सब कहते यह पारस हैं, जिसका जन्म महाश्मशान... मगर वो जिंदा शहर बनारस है, ~ अभिषेक
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