आकाशदीप (Aakashdeep) by Jaishankar Prasad: सार, पात्र और विषय
Quick answer: जयशंकर प्रसाद की आकाशदीप (Aakashdeep) का सार अंत सहित: बंदी चंपा और बुधगुप्त, मणिभद्र का जहाज़, द्वीप का दीप-स्तंभ और प्रेम का त्याग। विषय, शिल्प, प्रश्नोत्तर।
अँधेरे जहाज़ पर दो बंदी बँधे पड़े हैं और एक दूसरे से कहता है, मेरे बंधन खोल दो; यहीं से चंपा और बुधगुप्त की कहानी शुरू होती है, जो एक द्वीप के दीप पर समाप्त होगी। जयशंकर प्रसाद की यह कहानी छायावादी गद्य-कथा का सबसे पढ़ा गया उदाहरण है।
कहानी का सार, अंत सहित
जहाज़ का स्वामी मणिभद्र चंपा को बंदी बनाकर अपनी बनाना चाहता है और जल-दस्यु बुधगुप्त को भी बाँध रखा है। चंपा बुधगुप्त के बंधन खोलती है, बुधगुप्त मणिभद्र को मारकर जहाज़ पर अधिकार करता है, और तूफ़ान उन्हें एक अज्ञात द्वीप पर पहुँचा देता है। वहाँ बुधगुप्त व्यापार से द्वीप का स्वामी बन जाता है और चंपा के नाम पर उसे चंपा द्वीप कहता है।
चंपा ऊँचे स्तंभ पर हर रात दीप जलाती है ताकि समुद्र में भटके नाविकों को दिशा मिले; यही आकाशदीप है। बुधगुप्त उसे प्रेम करता है और साथ चलने को कहता है, पर चंपा जानती है कि उसके पिता की मृत्यु इसी जल-दस्यु के हाथों हुई थी। वह प्रेम स्वीकार करती है और साथ अस्वीकार। बुधगुप्त द्वीप छोड़कर चला जाता है। चंपा वहीं रह जाती है, हर रात आकाशदीप जलाती हुई, और द्वीप का नाम आज भी उसका है।
पात्र
दो बंदी, एक द्वीप, एक दीप।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: प्रेम और कर्तव्य का संघर्ष, त्याग की महिमा, स्त्री का आत्म-सम्मान, और परोपकार के प्रकाश का प्रतीक। तीखी बात यह कि चंपा का अस्वीकार घृणा से नहीं, प्रेम से निकलता है। वह क्षमा कर सकती है, साथ नहीं रह सकती, क्योंकि साथ रहना पिता की स्मृति पर दीप बुझाना होगा। प्रसाद प्रेम को पाने में नहीं, जलाए रखने में पूरा मानते हैं।
शिल्प: दीप का प्रतीक
कहानी बंधन में शुरू होती है और प्रकाश में समाप्त: रस्सी, तूफ़ान, द्वीप, स्तंभ। प्रसाद की भाषा काव्यात्मक है, पर प्रतीक ठोस है; दीप वास्तविक काम करता है, नाविकों को बचाता है, इसीलिए भाव का बोझ उठा पाता है। दूसरी सीख अंत का ठहराव है: नायक चला जाता है, नायिका रह जाती है, कहानी उसकी क्रिया पर बंद होती है। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता के निर्णायक ऐसे प्रतीक पसंद करते हैं जो कहानी में काम भी करे, केवल अर्थ न दे।
परीक्षा के लिए
शीर्षक के प्रतीकार्थ पर प्रश्न आता है।
What writers can take from this
- परीक्षा में आकाशदीप को परोपकार और त्याग का प्रतीक बताइए।
- चंपा के अस्वीकार को घृणा नहीं, प्रेम और कर्तव्य का संघर्ष लिखें।
- प्रसाद की काव्यात्मक भाषा पर एक पंक्ति दें, पर सार को ठोस रखें।
- अपनी कहानी का प्रतीक ऐसा चुनिए जो कथानक में काम भी करे, केवल अर्थ न दे।
- नायक के जाने के बाद नायिका की क्रिया पर कहानी बंद कीजिए, भाषण पर नहीं।
Try it yourself
दो लोग एक ही क़ैद से मिलकर छूटते हैं और एक नई जगह बसाते हैं। एक का अतीत दूसरे का सबसे बड़ा घाव है। प्रेम को स्वीकार होने दीजिए, साथ को नहीं, और कहानी उस वस्तु पर समाप्त कीजिए जिसे पीछे रह गया पात्र हर रात दोहराता है।
Questions
आकाशदीप कहानी का प्रतीकार्थ क्या है?
आकाशदीप परोपकार और त्याग का प्रतीक है। चंपा अपना प्रेम छोड़कर भटके नाविकों के लिए हर रात दीप जलाती है।
आकाशदीप में चंपा बुधगुप्त से दूर क्यों रहती है?
बुधगुप्त ने उसके पिता को मारा था। वह उसे प्रेम करती है और क्षमा भी, पर उसके साथ जीवन बिताना पिता की स्मृति का अपमान होता।
आकाशदीप किस शैली की कहानी है?
छायावादी काव्यात्मक गद्य की, जिसमें जयशंकर प्रसाद ऐतिहासिक-काल्पनिक पृष्ठभूमि में प्रेम और त्याग का द्वंद्व रचते हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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