बड़े घर की बेटी (Bade Ghar Ki Beti) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: बड़े घर की बेटी (Bade Ghar Ki Beti) का सार अंत सहित: आनंदी, श्रीकंठ, लालबिहारी, घी का झगड़ा, खड़ाऊँ और टूटने से बचा परिवार। विषय, शिल्प और परीक्षा के प्रश्नोत्तर।
एक दाल में डला घी एक संयुक्त परिवार को तोड़ने की सीमा तक ले जाता है, और फिर उसी परिवार की बहू उसे जोड़ लेती है। प्रेमचंद की यह कहानी 1910 में छपी और उनकी हिंदी की सबसे पुरानी कहानियों में है।
कहानी का सार, अंत सहित
बेनीमाधव सिंह गौरीपुर के ज़मींदार हैं, पर घर की हालत गिर चुकी है। बड़ा बेटा श्रीकंठ बी.ए. पास है और शहर में काम करता है; छोटा लालबिहारी गाँव में रहता है। श्रीकंठ की पत्नी आनंदी एक बड़े घर की बेटी है और इस साधारण घर में समझौते करके रहती है। एक दिन लालबिहारी की दाल में सारा घी डल जाता है; वह उलाहना देता है, आनंदी पलटकर बड़े घर की बात कहती है, और क्रोध में लालबिहारी उस पर खड़ाऊँ फेंक देता है।
शनिवार को श्रीकंठ आता है तो आनंदी अपमान सुनाती है। श्रीकंठ पिता से भाई को अलग करने की बात करता है और घर टूटने के कगार पर आ जाता है। लालबिहारी लज्जित है; वह घर छोड़कर जाने लगता है और भाभी के पास आकर अपने व्यवहार के लिए क्षमा माँगता है। आनंदी का हृदय पिघल जाता है, वह उसे रोक लेती है और श्रीकंठ से कहती है कि उसने बात बढ़ाई थी। बेनीमाधव सिंह यह देखकर कहते हैं कि बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं।
पात्र
एक बहू, दो भाई, एक पिता।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: संयुक्त परिवार की रक्षा, स्त्री की उदारता, शिक्षा और संस्कार, छोटी बातों से बड़े कलह। तीखी बात यह कि परिवार बचाने का पूरा भार स्त्री पर है और लेखक इसे उसका गुण कहता है। आनंदी अपमान सहकर क्षमा करती है और उसी से बड़ी कहलाती है। प्रेमचंद का आदर्श घर की एकता को सर्वोपरि रखता है; आज का पाठक पूछ सकता है कि कीमत कौन चुकाता है।
शिल्प: छोटी वस्तु, बड़ा संकट
प्रेमचंद कलह को घी की एक कटोरी से शुरू करते हैं, इसलिए झगड़ा घर जैसा लगता है, नाटक जैसा नहीं; खड़ाऊँ तक हर कदम छोटा है और यही छोटापन उसे विश्वसनीय बनाता है। दूसरी सीख उलटफेर का समय है: लालबिहारी की क्षमा तब आती है जब घर टूटना तय हो चुका है। सुलह को अंतिम संभव क्षण तक रोकिए, तभी वह अर्जित लगेगी।
परीक्षा के लिए
शीर्षक की सार्थकता पर प्रश्न निश्चित है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक को आनंदी के व्यवहार से जोड़िए, उसके कुल से नहीं।
- घी की कटोरी को कलह के छोटे कारण के रूप में उद्धृत करें।
- लालबिहारी के पश्चात्ताप को भी श्रेय दें; सुलह दोतरफ़ा है।
- अपनी कहानी में बड़े संकट को किसी छोटी घरेलू वस्तु से शुरू कीजिए।
- सुलह को अंतिम संभव क्षण तक रोकिए, तभी वह अर्जित लगेगी।
Try it yourself
एक संयुक्त परिवार में किसी बहुत छोटी वस्तु से झगड़ा शुरू होता है और विभाजन तक पहुँचता है। कहानी में वह क्षण लिखिए जब एक पात्र अपमान भूलकर घर को चुनता है, और पाठक को यह तय करने दीजिए कि यह उदारता थी या कीमत।
Questions
बड़े घर की बेटी कहानी का मूल संदेश क्या है?
उदारता और क्षमा से परिवार की एकता बचती है। आनंदी अपना अपमान भूलकर देवर को रोक लेती है और घर टूटने से बच जाता है।
बड़े घर की बेटी में झगड़ा किस बात पर हुआ?
लालबिहारी की दाल में सारा घी डल जाने पर उसने आनंदी को उलाहना दिया; बात बढ़ी और उसने खड़ाऊँ फेंक दी।
बड़े घर की बेटी कब लिखी गई?
1910 में। यह प्रेमचंद की सबसे पुरानी हिंदी कहानियों में है और पाठ्यक्रमों में लंबे समय से पढ़ाई जाती है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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