बालक (Balak) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: प्रेमचंद की बालक (Balak) का सार अंत सहित: गंगू ब्राह्मण, विधवा गोमती से विवाह, उसका चले जाना और दूसरे के बच्चे को अपनाना। विषय, शिल्प और परीक्षा के प्रश्नोत्तर।
कथावाचक का ब्राह्मण नौकर गंगू नौकरी छोड़कर आता है और बताता है कि वह विधवा-आश्रम की गोमती से विवाह कर रहा है, जिसके बारे में मोहल्ला जानता है कि वह कई बार घर बसाकर छोड़ चुकी है। प्रेमचंद की यह कहानी नैतिकता के दो पैमानों की कहानी है, कथावाचक का और गंगू का।
कहानी का सार, अंत सहित
कथावाचक गंगू को समझाता है कि गोमती का अतीत जाना-माना है, पर गंगू कहता है कि उसका अतीत उसका है, वह उसे सुखी रखेगा। विवाह होता है और कुछ महीने दोनों ठीक रहते हैं। फिर एक दिन गोमती गंगू के गहने-पैसे लेकर ग़ायब हो जाती है। कथावाचक को अपनी भविष्यवाणी सही लगती है और वह गंगू पर थोड़ा तरस, थोड़ा व्यंग्य महसूस करता है।
पर गंगू टूटता नहीं; वह गोमती को खोजता रहता है और अंत में उसे लखनऊ में एक नवजात बच्चे के साथ पाता है। पता चलता है कि गोमती इसी बच्चे के कारण भागी थी, क्योंकि वह गंगू का नहीं था और वह उसे लज्जा से बचाना चाहती थी। गंगू उसे और बच्चे को घर ले आता है और सबके सामने बालक को अपना बेटा कहता है। कथावाचक जब गंगू को बच्चे को गोद में लिए देखता है, तो उसे लगता है कि अपनी पढ़ाई और नीति के साथ वह इस अनपढ़ ब्राह्मण के सामने बहुत छोटा है।
पात्र
एक नौकर जो मालिक से बड़ा निकलता है।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: विधवा-विवाह, सामाजिक नैतिकता बनाम मानवीय प्रेम, स्त्री के चरित्र पर समाज का फ़ैसला, और सच्चे पिता की परिभाषा। तीखी बात यह कि कहानी का असली पात्र कथावाचक है। वह हर कदम पर सही लगता है, तर्क उसके पास है, अनुभव उसके पास है, और अंत में वही अकेला हारता है। प्रेमचंद पाठक को कथावाचक की कुर्सी पर बिठाते हैं ताकि उसकी हार हमारी भी हो।
शिल्प: ग़लत साबित होता कथावाचक
कहानी प्रथम पुरुष में है और कथावाचक की हर भविष्यवाणी बीच तक सही निकलती है, यहाँ तक कि गोमती का भागना भी। यही उसकी अंतिम हार को इतना तीखा बनाता है: वह तथ्यों में सही और मनुष्यता में ग़लत था। दूसरी सीख अंतिम छवि है, गंगू की गोद में दूसरे का बच्चा, जिसे लेखक कोई सूक्ति नहीं देता। अपनी कहानी में तर्क को जीतने दीजिए और फिर उसे एक छवि से हराइए।
परीक्षा के लिए
शीर्षक का अर्थ पूछा जाता है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक को गंगू के प्रेम की परीक्षा से जोड़िए।
- कथावाचक की तर्क में जीत और मनुष्यता में हार को कहानी का केंद्र बताइए।
- विधवा-विवाह को प्रेमचंद के सामाजिक सुधार के विषय के रूप में लिखें।
- अपनी कहानी में कथावाचक को बीच तक सही और अंत में ग़लत साबित होने दीजिए।
- अंतिम छवि को बिना सूक्ति के छोड़िए; गोद में बच्चा अपने आप बोलता है।
Try it yourself
एक शिक्षित कथावाचक किसी साधारण व्यक्ति के फ़ैसले को मूर्खता मानता है और उसकी हर भविष्यवाणी बीच तक सही निकलती है। अंत में एक ऐसी छवि लिखिए जो कथावाचक को बिना एक भी तर्क के हरा दे।
Questions
बालक कहानी का मूल संदेश क्या है?
मनुष्यता समाज की नैतिकता से बड़ी है। अनपढ़ गंगू विधवा गोमती और उसके दूसरे के बच्चे को अपनाकर शिक्षित कथावाचक को छोटा कर देता है।
बालक कहानी में गोमती क्यों भाग गई थी?
वह किसी और का बच्चा जन्म देने वाली थी और गंगू को लज्जा से बचाना चाहती थी; गंगू उसे लखनऊ में बच्चे के साथ पाता है।
बालक कहानी का शीर्षक क्यों सार्थक है?
वह बच्चा ही गंगू के प्रेम की परीक्षा और कथावाचक की नीति की हार है; कहानी उसी की गोद में समाप्त होती है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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