बालगोबिन भगत (Balgobin Bhagat) by Ramvriksh Benipuri: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 क्षितिज
Quick answer: बालगोबिन भगत (Balgobin Bhagat) रामवृक्ष बेनीपुरी का रेखाचित्र, कक्षा 10 क्षितिज भाग 2: कबीरपंथी गृहस्थ-संत की पूरी कथा अंत सहित, विषय और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
एक किसान अपने इकलौते बेटे के शव के सामने बैठा है और रो नहीं रहा, गा रहा है, क्योंकि उसकी नज़र में आत्मा अपने प्रियतम से मिलने गई है। रामवृक्ष बेनीपुरी का यह रेखाचित्र, क्षितिज भाग 2 में संकलित, ऐसे ही एक गृहस्थ-संत का शब्द-चित्र है।
पाठ का सार
बालगोबिन भगत साठ से ऊपर के किसान हैं, सिर पर कबीरपंथी कनफटी टोपी। खेती करते हैं पर हर उपज पहले कबीर के मठ में भेंट चढ़ाते हैं और जो प्रसाद में मिले उसी से घर चलाते हैं। भोर में उठकर गाँव से दो मील दूर नदी में स्नान करते हैं और पोखर के किनारे खँजड़ी बजाकर कबीर के पद गाते हैं।
उनका इकलौता सुस्त बेटा मर जाता है। भगत रोने की जगह पतोहू से कहते हैं कि उत्सव मनाओ, आत्मा परमात्मा से मिल गई। शव के सामने बैठकर गाते हैं। श्राद्ध के बाद वे पतोहू को उसके भाई के साथ भेजकर पुनर्विवाह का आदेश देते हैं। वे हर वर्ष गंगा-स्नान को पैदल जाते हैं। अंतिम वर्ष लौटने पर बीमार पड़ते हैं, फिर भी नियम नहीं तोड़ते। एक भोर उनके गीत की आवाज़ बंद है; गाँव देखता है कि भगत जी गाते-गाते चले गए।
पात्र
बालगोबिन भगत गृहस्थ होकर संत हैं; उनके लिए भजन जीवन-पद्धति है, आडंबर नहीं। पतोहू सेवा-भाव और परंपरा में बँधी युवती है, जिसे भगत नया जीवन देते हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: सच्ची भक्ति आचरण में है, वेश में नहीं; मृत्यु आत्मा का मिलन है; विधवा पुनर्विवाह का समर्थन; श्रम और सत्य पर आधारित जीवन।
मेरी टिप्पणी: पाठ का सबसे साहसी निर्णय पतोहू को विदा करना है। भगत अपने अकेलेपन की कीमत पर उसका भविष्य चुनते हैं। यही व्यक्तिगत हानि वाला निर्णय उन्हें केवल भजन गाने वाले से संत बनाता है।
लेखक की शैली और शिल्प
बेनीपुरी रेखाचित्र को ऋतुओं से बाँधते हैं: आषाढ़ की रोपनी, भादों की अँधेरी रात, कार्तिक की भोर, माघ की ठंड में भी उनका गान। इससे एक व्यक्ति का पूरा वर्ष और पूरा जीवन एक साथ दिखता है। किसी पात्र का चित्र खींचना हो तो उसके दिनचर्या-चक्र को ऋतुओं से जोड़ने की यह तरकीब सीखने योग्य है।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- भगत के चार आयाम (साधु का आचरण, किसान का श्रम, पिता का निर्णय, गायक की भोर) उत्तर में अलग-अलग लिखें।
- 'संत किसे कहें' वाले प्रश्न में वेश बनाम आचरण की तुलना करें।
- पुनर्विवाह वाला प्रसंग सामाजिक सुधार के प्रश्न में सबसे बड़ा प्रमाण है।
- रेखाचित्र लिखते समय पात्र की दिनचर्या को ऋतुओं से जोड़ें, जीवन की गति दिखती है।
- मृत्यु का दृश्य नाटकीय न बनाएँ; बेनीपुरी उसे एक बंद आवाज़ से कहते हैं।
Try it yourself
अपने गाँव या मोहल्ले के किसी ऐसे व्यक्ति का शब्द-चित्र लिखिए जिसकी एक दैनिक आदत पूरे इलाके की घड़ी है। कहानी उस दिन समाप्त हो जब वह आदत पहली बार टूटती है।
Questions
बालगोबिन भगत को साधु क्यों कहा गया है?
वे वेश से किसान थे पर आचरण से संत: सत्य बोलते, किसी की वस्तु नहीं छूते, उपज पहले कबीर के मठ में चढ़ाते और भोर में भजन गाते थे। उनका संतत्व गृहस्थी के भीतर था।
भगत ने बेटे की मृत्यु पर क्या किया?
उन्होंने पतोहू से उत्सव मनाने को कहा और शव के सामने बैठकर गाते रहे, क्योंकि उनके अनुसार आत्मा परमात्मा से मिल गई थी।
बालगोबिन भगत किस विधा की रचना है?
यह रेखाचित्र है, जिसमें लेखक एक वास्तविक व्यक्ति का व्यक्तित्व और दिनचर्या शब्दों में चित्रित करते हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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