बूढ़ी काकी (Boodhi Kaki) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: बूढ़ी काकी (Boodhi Kaki) का सार अंत सहित: भूखी काकी, बुद्धिराम और रूपा का घर, लाडली की पूरियाँ, जूठी पत्तलें और रूपा का पश्चात्ताप। विषय, शिल्प, प्रश्नोत्तर।
बुढ़ापे में काकी की सारी इंद्रियाँ जवाब दे चुकी हैं, केवल स्वाद बचा है, और घर में भोज की तैयारी की सुगंध उसे कोठरी से बाहर खींचती है। प्रेमचंद की यह कहानी 1921 में छपी और वृद्धावस्था पर हिंदी की सबसे पढ़ी गई कहानियों में है।
कहानी का सार, अंत सहित
काकी ने सारी जायदाद भतीजे बुद्धिराम के नाम लिख दी थी और अब उसी के घर में उपेक्षित है। रूपा उसे भर पेट खाना नहीं देती; केवल छोटी लाडली उससे स्नेह रखती है। घर में बेटे के तिलक का भोज है। सुगंध से बेचैन काकी घिसटती हुई आँगन में पहुँच जाती है, मेहमानों के सामने अपमान होता है और बुद्धिराम उसे कोठरी में घसीट ले जाता है।
रात को लाडली अपने हिस्से की पूरियाँ काकी को लाकर देती है, पर काकी की भूख इससे और बढ़ जाती है। आधी रात वह आँगन में पहुँचती है, जहाँ मेहमानों की जूठी पत्तलें पड़ी हैं, और उनसे बचे टुकड़े उठाकर खाने लगती है। रूपा की नींद खुलती है और यह दृश्य देखकर उसका हृदय काँप उठता है; उसे लगता है कि उसने काकी के अन्न पर ही अपना घर सजाया और उसे जूठन तक पहुँचाया। वह थाली में सारे व्यंजन लाकर काकी को खिलाती है और काकी तृप्त होकर आशीष देती है।
पात्र
एक बूढ़ी, एक घर, और एक बच्ची जो अकेली मनुष्य है।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: वृद्धों की उपेक्षा, संपत्ति के बदले सेवा का टूटा वादा, बाल-हृदय की करुणा, और अंत में पश्चात्ताप से सुधार। तीखी बात यह कि प्रेमचंद काकी को महिमामंडित नहीं करते; उसकी भूख लालच की सीमा तक जाती है, वह पूरियों के बाद भी जूठन खोजती है। कहानी की करुणा इसी में है कि बुढ़ापा किसी को संत नहीं बनाता, बच्चा बनाता है, और घर उस बच्चे को खिलाना भूल गया है।
शिल्प: सुगंध कथानक चलाती है
पूरी कहानी में काकी को कोठरी से बाहर लाने वाली चीज़ सुगंध है: घी, पकवान, कचौड़ियाँ। प्रेमचंद उसे इंद्रिय से चलाते हैं, विचार से नहीं, इसलिए उसकी हर हरकत अपमान के बाद भी समझ में आती है। दूसरी सीख रूपा का हृदय-परिवर्तन है, जो भाषण से नहीं, एक दृश्य देखने से होता है; जूठी पत्तलों के बीच बैठी काकी ही उपदेश है। अपनी कहानी में पात्र को बदलने के लिए उसे कुछ दिखाइए, कुछ सुनाइए मत।
परीक्षा के लिए
रूपा के पश्चात्ताप का कारण पूछा जाता है।
What writers can take from this
- परीक्षा में काकी की भूख को उपेक्षित बुढ़ापे का प्रतीक बताइए।
- लाडली को बाल-हृदय की सहज करुणा के रूप में लिखें।
- रूपा के पश्चात्ताप को कहानी का आदर्शवादी समाधान कहें।
- अपनी कहानी में पात्र को किसी इंद्रिय से चलाइए, विचार से नहीं; सुगंध यहाँ कथानक है।
- हृदय-परिवर्तन के लिए पात्र को दृश्य दिखाइए, उपदेश नहीं।
Try it yourself
किसी घर में उत्सव है और एक उपेक्षित पात्र को उससे दूर रखा गया है। उसे केवल एक इंद्रिय के सहारे उत्सव की ओर खींचिए, अपमान का एक दृश्य लिखिए, और अंत ऐसे दृश्य पर कीजिए जो किसी दूसरे पात्र को बिना शब्दों के बदल दे।
Questions
बूढ़ी काकी कहानी का मूल संदेश क्या है?
वृद्धों की उपेक्षा और उसका पश्चात्ताप। जायदाद ले लेने के बाद परिवार काकी को भूखा रखता है, और अंत में रूपा अपने अन्याय को पहचानती है।
बूढ़ी काकी के अंत में क्या होता है?
आधी रात काकी जूठी पत्तलों से टुकड़े खाती मिलती है; रूपा यह देखकर पछताती है और उसे थाली भरकर खिलाती है।
बूढ़ी काकी में लाडली कौन है?
बुद्धिराम की छोटी बेटी, जो अकेली काकी से स्नेह रखती है और रात में अपनी पूरियाँ उसे लाकर देती है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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