छोटा जादूगर (Chhota Jadugar) by Jaishankar Prasad: सार, पात्र और विषय
Quick answer: जयशंकर प्रसाद की छोटा जादूगर (Chhota Jadugar) का सार अंत सहित: कार्निवल का तेरह साल का बालक, जेल में पिता, बीमार माँ और अंतिम खेल। विषय, शिल्प और परीक्षा के प्रश्नोत्तर।
कार्निवल की चहल-पहल में एक तेरह साल का लड़का चारखाने का कुरता पहने खड़ा है और किसी तमाशे पर पैसा खर्च करने से इनकार करता है, क्योंकि उसे माँ की दवा के लिए कमाना है। जयशंकर प्रसाद की यह कहानी उनकी सबसे सीधी और सबसे पढ़ाई जाने वाली रचनाओं में है।
कहानी का सार, अंत सहित
कथावाचक कार्निवल में लड़के से बात करता है। पता चलता है कि उसके पिता देश के काम में जेल गए हैं और माँ बीमार है; वह ताश, गुड़िया और छोटे-छोटे खेल दिखाकर कमाता है। कथावाचक की पत्नी उसे खेल दिखाने को कहती है; लड़का चतुराई से तमाशा करता है, पैसे पाता है और अपनी माँ के पास भाग जाता है। कथावाचक को वह छोटा जादूगर याद रह जाता है।
कुछ दिन बाद कथावाचक उसे सड़क पर तमाशा दिखाते देखता है। आज उसका खेल बिगड़ रहा है, गुड़िया ठीक नहीं बैठती, हाथ काँपते हैं। वह बताता है कि माँ ने कहा था जल्दी लौटना, वह आज बहुत बीमार है। कथावाचक उसे अपनी गाड़ी में उसकी झोपड़ी तक ले जाता है। भीतर माँ की आँखें बंद हो चुकी हैं। लड़का उससे लिपटकर बच्चे की तरह रोता है, और कहानी वहीं समाप्त होती है।
पात्र
एक बच्चा जो बड़ा बन गया है।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: बाल-श्रम और परिस्थिति से थोपी परिपक्वता, माँ-बेटे का प्रेम, स्वाधीनता-संग्राम की परोक्ष छाया, और वर्ग-भेद। तीखी बात यह कि लड़के का जादू उसका पेशा नहीं, उसका कवच है। वह हँसाता है ताकि उसे कोई दया न दिखाए, और उसका खेल तभी बिगड़ता है जब भीतर का डर कवच से बड़ा हो जाता है। प्रसाद बाल-श्रम पर भाषण नहीं देते; काँपते हाथ काफ़ी हैं।
शिल्प: खेल का बिगड़ना
पहले दृश्य में तमाशा सफ़ाई से चलता है और दूसरे में वही खेल बिगड़ता है; प्रसाद दोनों को समान विस्तार से लिखते हैं ताकि दूसरा दृश्य बताए बिना बता दे कि कुछ भयानक होने वाला है। दूसरी सीख माँ को पर्दे के पीछे रखना है, जिससे मृत्यु सूचना नहीं, झटका बनती है। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता में हर प्रतिभागी को 100 में स्कोर और प्रमाणपत्र मिलता है, और भावनात्मक प्रभाव के अंक ऐसे ही संकेतों को पहचानते हैं।
परीक्षा के लिए
शीर्षक के अर्थ पर प्रश्न आता है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक को दोहरे अर्थ में लिखें: खेल का जादूगर और परिस्थिति से बड़ा बना बच्चा।
- पिता के जेल में होने को स्वाधीनता-संग्राम की छाया के रूप में एक पंक्ति दें।
- बिगड़ते खेल के दृश्य को कहानी का पूर्व-संकेत बताइए।
- अपनी कहानी में एक ही क्रिया दो बार दिखाइए, पहले सफल, फिर बिगड़ती; अंतर पाठक को सब बता देगा।
- सबसे बड़े दुख को पर्दे के पीछे रखिए, ताकि वह सूचना नहीं, झटका बने।
Try it yourself
एक बच्चा किसी कौशल से कमाता है और उसी कौशल के पीछे अपना डर छिपाता है। कौशल का एक सफल दृश्य लिखिए, फिर वही दृश्य बिगड़ता हुआ, और दुख का असली कारण अंत में एक बंद दरवाज़े के पीछे रखिए।
Questions
छोटा जादूगर कहानी का मूल संदेश क्या है?
परिस्थिति बच्चे को उम्र से पहले बड़ा बना देती है, पर माँ के सामने वह बच्चा ही रहता है। कहानी बाल-श्रम और स्वाधीनता-संग्राम की छाया में एक बेटे का चित्र है।
छोटा जादूगर के अंत में क्या होता है?
कथावाचक बिगड़ते खेल वाले लड़के को गाड़ी से घर पहुँचाता है, पर माँ मर चुकी होती है और लड़का उससे लिपटकर रोता है।
छोटा जादूगर का पिता कहाँ है?
देश के काम में जेल गया है, जो कहानी में स्वाधीनता-संग्राम की परोक्ष छाया है; इसीलिए लड़का घर की कमाई सँभालता है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
Enter a Writory story contest
Enter the Writory Short Story Contest and have your own story read and scored out of 100. Entries close 25 November. That first entry makes you a Writorian.