डायरी का एक पन्ना (Diary Ka Ek Panna) by Sitaram Seksaria: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 स्पर्श
Quick answer: डायरी का एक पन्ना (Diary Ka Ek Panna) सीताराम सेकसरिया की डायरी, कक्षा 10 स्पर्श भाग 2: 26 जनवरी 1931 के कलकत्ता का पूरा विवरण, विषय, शैली और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
26 जनवरी 1931 को कलकत्ता के मैदान में हज़ारों लोग एक झंडे के नीचे खड़े हैं, पुलिस की लाठियाँ चल रही हैं, और एक व्यापारी उस रात अपनी डायरी में लिखता है कि आज का दिन शहर की याद में रहेगा। सीताराम सेकसरिया का यह पन्ना स्पर्श भाग 2 में संकलित है।
पाठ का सार
पिछले वर्ष 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था; इस बार उसकी वर्षगाँठ है। पुलिस ने मोन्यूमेंट के पास सभा और झंडारोहण पर रोक लगा दी है। कौंसिल ने तय किया है कि हर हाल में झंडा फहराया जाएगा। दिन में लोग टोलियों में मैदान की ओर बढ़ते हैं।
सुभाष बाबू जुलूस लेकर निकलते हैं और पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है। इसके बाद लाठियाँ चलती हैं, कई लोग घायल होते हैं, और भीड़ फिर भी हटती नहीं। स्त्रियाँ बड़ी संख्या में हैं; उन्होंने जुलूस निकाला, झंडा फहराया और गिरफ़्तारी दी। 105 स्त्रियाँ पकड़कर लालबाज़ार थाने ले जाई गईं, जिन्हें रात नौ बजे छोड़ा गया। लेखक लिखते हैं कि इतनी लाठियाँ चलने के बाद भी लोगों के उत्साह में कमी नहीं आई और यह दिन कलकत्ता के लिए गौरव का दिन है।
प्रमुख व्यक्ति
सीताराम सेकसरिया लेखक और कार्यकर्ता हैं, जिनकी आँख से पूरा दिन दिखता है। सुभाषचंद्र बोस जुलूस के नेता हैं, जिनकी गिरफ़्तारी दिन का मोड़ है। जानकी देवी, मदालसा और अन्य स्त्रियाँ आंदोलन का साहसी चेहरा हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: अहिंसक प्रतिरोध की शक्ति, स्त्रियों की सक्रिय भागीदारी, कलकत्ता पर लगे कलंक का धुलना, और डायरी विधा में इतिहास की गवाही।
मेरी टिप्पणी: पन्ने की सबसे बड़ी ताक़त उसका हिसाब-किताब है। लेखक भावुक नहीं होते, गिनती करते हैं: कितने घायल, कितनी गिरफ़्तार, किस समय छूटे। यह व्यापारी की आँख है, और उसी से यह दस्तावेज़ भरोसेमंद बनता है; जज़्बात नारों में नहीं, संख्याओं में दर्ज हैं।
लेखक की शैली और शिल्प
डायरी होने से भाषा तत्काल और अनौपचारिक है, वाक्य छोटे, समय-क्रम में लिखे गए। लेखक स्थान-नाम और समय दर्ज करते हैं, जिससे पाठक उस दिन का नक्शा बना लेता है। कथा लिखने वालों के लिए सीख यह है कि किसी बड़े दिन का असर बताने के लिए उसकी छोटी संख्याएँ पर्याप्त हैं।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- तारीख और संख्याएँ (26 जनवरी 1931, 105 स्त्रियाँ, रात नौ बजे) उत्तर में ज़रूर दें।
- डायरी विधा की विशेषताएँ (तिथि, प्रथम पुरुष, तत्काल भाव) एक पंक्ति में लिखें।
- स्त्रियों की भूमिका पर अलग अनुच्छेद बनाएँ; यह सबसे बार पूछा जाने वाला बिंदु है।
- अपनी डायरी-शैली की कहानी में भावना की जगह गिनती और समय लिखें, असर ज़्यादा होता है।
- किसी बड़े दिन को एक साधारण गवाह की नज़र से लिखने का अभ्यास करें।
Try it yourself
किसी ऐतिहासिक या सामूहिक घटना का एक पन्ना ऐसे व्यक्ति की डायरी में लिखिए जो नेता नहीं, साधारण गवाह है। तिथि, समय और संख्याओं से भाव जगाइए, विशेषणों से नहीं।
Questions
डायरी का एक पन्ना पाठ किस घटना पर है?
26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में पहले स्वतंत्रता दिवस की वर्षगाँठ पर हुए झंडारोहण, सुभाष बाबू की गिरफ़्तारी, लाठीचार्ज और स्त्रियों की व्यापक भागीदारी पर।
इस दिन कितनी स्त्रियाँ गिरफ़्तार हुईं?
105 स्त्रियाँ पकड़कर लालबाज़ार थाने ले जाई गईं और रात नौ बजे छोड़ी गईं।
डायरी का एक पन्ना किस विधा में है?
यह डायरी विधा है, जिसमें लेखक उस दिन की घटनाओं को समय-क्रम में प्रथम पुरुष में दर्ज करते हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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