दो बैलों की कथा (Do Bailon Ki Katha) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: दो बैलों की कथा (Do Bailon Ki Katha) का सार अंत सहित: हीरा, मोती, झूरी, गया का घर, काँजीहौस और दढ़ियल। विषय, प्रतीक, शिल्प और परीक्षा के प्रश्नोत्तर।
गधे को सबसे बुद्धू जानवर कहा जाता है, पर कहानी की शुरुआत में प्रेमचंद उसकी सहनशीलता की तारीफ़ करके बैलों की ओर मुड़ते हैं, जो सहते भी हैं और सिर भी उठाते हैं। यह कहानी 1931 में छपी, कक्षा नौ की पाठ्यपुस्तक में है, और स्वतंत्रता-संग्राम के वर्षों में लिखी गई थी।
कहानी का सार, अंत सहित
झूरी काछी के बैल हीरा और मोती इतने मित्र हैं कि सींग मिलाकर बातें करते हैं। झूरी उन्हें ससुराल गया के घर भेजता है, जहाँ खराब बर्ताव पर दोनों रस्सी तोड़कर रात में घर लौट आते हैं। गया उन्हें फिर ले जाता है और बाँधकर पीटता है। वहाँ एक छोटी लड़की उन्हें रोटी देती है और अंत में रस्सी खोल देती है।
भागते हुए दोनों मटर के खेत में घुसते हैं, एक साँड़ से लड़कर जीतते हैं, फिर पकड़े जाकर काँजीहौस में बंद होते हैं। मोती दीवार तोड़कर सबको भगाता है पर बँधे हीरा को छोड़कर नहीं जाता। दोनों नीलाम होकर एक दढ़ियल के हाथ लगते हैं। रास्ते में परिचित खेत देखकर वे दौड़ पड़ते हैं और झूरी के द्वार पर पहुँचते हैं। दढ़ियल पीछे आता है, पर झूरी की पत्नी अब उनका पक्ष लेती है और वह लौट जाता है।
पात्र
दो बैल, और उनके आस-पास के मनुष्य।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: स्वाधीनता की चाह, मित्रता, सहनशीलता और विद्रोह के बीच संतुलन, और उपनिवेशवाद पर परोक्ष टिप्पणी, क्योंकि 1931 में ग़ुलामी से भागते बैल केवल बैल नहीं थे। तीखी बात यह कि कहानी में दो बार भागकर घर लौटना ही जीत है। प्रेमचंद स्वाधीनता को जंगल में नहीं, अपने चुने हुए मालिक के द्वार पर पाते हैं; उनका आदर्श विद्रोह नहीं, सम्मान के साथ वापसी है।
शिल्प: पशुओं में मनुष्य
बैल बोलते नहीं, पर प्रेमचंद उनके सींग मिलाने और लड़की की रोटी पर द्रवित होने को इतना ठोस लिखते हैं कि पाठक उन्हें पात्र मानने लगता है। दूसरी सीख है दोहराव के साथ बढ़ोतरी: दो बार ससुराल, दो बार पलायन, हर बार संकट बड़ा, ताकि वापसी अर्जित लगे। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता की रूब्रिक में चरित्र के अंक ऐसे ही ठोस, बिना संवाद वाले संकेतों पर मिलते हैं।
परीक्षा के लिए
गधे वाली भूमिका और काँजीहौस पर प्रश्न आते हैं।
What writers can take from this
- परीक्षा में गधे वाली भूमिका का उद्देश्य लिखें: सहनशीलता और मूर्खता के भेद पर व्यंग्य।
- 1931 की पृष्ठभूमि जोड़ें: स्वाधीनता की चाह कहानी का परोक्ष विषय है।
- हीरा और मोती के स्वभाव-भेद को तुलना में लिखें, संयम बनाम आवेग।
- अपनी कहानी में बिना संवाद वाले पात्र को ठोस शारीरिक संकेतों से बोलने दीजिए।
- घटनाओं को दोहराव के साथ बढ़ाइए; दूसरा संकट पहले से बड़ा हो।
Try it yourself
दो अबोल प्राणियों की कहानी लिखिए जो एक ही जगह से दो बार भागते हैं। हर पलायन के बाद संकट बड़ा हो, उनकी मित्रता किसी शारीरिक संकेत से दिखे, और अंत वापसी पर हो, किसी नई जगह पर नहीं।
Questions
दो बैलों की कथा का मूल संदेश क्या है?
स्वाधीनता की चाह और मित्रता की शक्ति। हीरा और मोती दुर्व्यवहार सहते हैं पर हर बार भागकर अपने चुने हुए मालिक तक लौटते हैं।
दो बैलों की कथा में काँजीहौस क्या है?
आवारा या पकड़े गए पशुओं का बाड़ा, जहाँ हीरा और मोती को भूखे जानवरों के साथ बंद किया गया और जहाँ मोती ने दीवार तोड़ी।
दो बैलों की कथा का अंत क्या है?
दढ़ियल कसाई से भागकर दोनों बैल झूरी के द्वार पर पहुँचते हैं; झूरी की पत्नी उनकी रक्षा करती है और कसाई लौट जाता है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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