दूध का दाम (Doodh Ka Daam) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: दूध का दाम (Doodh Ka Daam) का सार अंत सहित: भूंगी का दूध, बाबू महेशनाथ का बेटा, अनाथ मंगल और कुत्ता टॉमी। विषय, शिल्प, शब्दार्थ और परीक्षा के प्रश्नोत्तर।
बाबू महेशनाथ के घर तीन बेटियों के बाद बेटा हुआ है और उसे दूध पिलाने के लिए भंगिन भूंगी रखी गई है, जिसका अपना बेटा मंगल उसी दूध में हिस्सा बँटाकर बड़ा हो रहा है। प्रेमचंद ने यह कहानी 1934 में लिखी; अंग्रेज़ी में इसका The Price of Milk पृष्ठ भी है।
कहानी का सार, अंत सहित
महेशनाथ की पत्नी को दूध नहीं उतरता, तो भूंगी बेटे सुरेश को अपना दूध पिलाती है और उसका मंगल ऊपर के दूध पर पलता है। बदले में उसे इनाम के वादे मिलते हैं। कुछ बरस में मंगल का पिता गूदड़ प्लेग में मर जाता है और आगे भूंगी भी नहीं रहती। अनाथ मंगल बंगले के बाहर नीम के नीचे रहता है, जूठन खाता है, और उसका इकलौता साथी कुत्ता टॉमी है।
सुरेश उसे खेल में घोड़ा बनाता है और मारता है। एक दिन मंगल चिल्ला पड़ता है, नौकर उसे पीटते हैं और वह टॉमी को लेकर घर छोड़ देता है। भूखा दिन बीतता है। रात को वह चुपचाप लौटता है और नीम के नीचे फेंकी जूठन कुत्ते के साथ बाँटकर खाता है। यही उस दूध का दाम है जो उसकी माँ ने इस घर के बेटे को पिलाया था।
पात्र
एक बच्चा, एक कुत्ता, और एक घर जो कर्ज़ भूल गया।
- मंगल: भूंगी का बेटा, जिसके हिस्से का दूध बाबू के बेटे ने पिया और जिसे जूठन मिली।
- भूंगी: दूध पिलाने वाली, जिसकी मृत्यु के साथ वादे भी मर गए।
- महेशनाथ और सुरेश: उदार दिखने वाला मालिक और उसका बेटा, जिसके लिए मंगल खिलौना है।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: छुआछूत, वर्ग-भेद, कृतघ्नता, बाल-मनोविज्ञान, और शीर्षक का व्यंग्य कि दूध का दाम जूठन में चुकाया गया। तीखी बात यह कि प्रेमचंद महेशनाथ को खलनायक नहीं बनाते; वह उदार बातें करता है, बस मंगल को मनुष्य की श्रेणी में नहीं गिनता। कुत्ते और बच्चे को एक थाली देना घर की स्वाभाविक व्यवस्था है, और यही स्वाभाविकता कहानी का सबसे कड़ा आरोप है।
शिल्प: कुत्ता कहानी का दर्पण है
टॉमी सजावट नहीं। मंगल का हर सुख-दुख कुत्ते के साथ बँटता है और अंत में दोनों एक जूठन पर झुकते हैं; लेखक को कहना नहीं पड़ता कि समाज ने बच्चे को क्या दरजा दिया। दूसरी सीख शीर्षक का देर से खुलना है: अंतिम वाक्य तक दूध और दाम का संबंध छिपा रहता है, फिर एक झटके में हिसाब बंद होता है। अपने शीर्षक को अंतिम पंक्ति में नया अर्थ देने का अभ्यास कीजिए।
परीक्षा के लिए
शीर्षक पर प्रश्न हर बार आता है।
- शब्दार्थ: दाम (कीमत), भंगिन (सफ़ाई का काम करने वाली स्त्री), जूठन (खाने से बचा हुआ), प्लेग (महामारी), नीम (एक पेड़), कृतघ्नता (उपकार भूल जाना)।
- चरित्र-चित्रण, मंगल: भंगिन भूंगी का बेटा, जिसकी माँ के दूध पर बाबू का बेटा पला। अनाथ होने पर वह बंगले के बाहर नीम के नीचे कुत्ते टॉमी के साथ रहता है, सुरेश के खेल में घोड़ा बनता है और मार खाता है। उसमें विद्रोह की चिंगारी है, वह घर छोड़ता है, पर भूख उसे जूठन तक वापस ले आती है। वह समाज की कृतघ्नता का जीवित हिसाब है।
- प्रश्न: भूंगी को घर में क्यों रखा गया? उत्तर: महेशनाथ के बेटे को दूध पिलाने के लिए।
- प्रश्न: मंगल घर छोड़कर क्यों गया और क्यों लौटा? उत्तर: पिटाई से चला गया, भूख उसे जूठन तक वापस ले आई।
- प्रश्न: शीर्षक की सार्थकता बताइए। उत्तर: दूध का दाम बेटे को कुत्ते के साथ बँटी जूठन के रूप में मिला।
- 100 शब्दों का सार: बाबू महेशनाथ के घर तीन बेटियों के बाद बेटा सुरेश होता है और भंगिन भूंगी उसे अपना दूध पिलाती है, जबकि उसका बेटा मंगल ऊपर के दूध पर पलता है। भूंगी को इनाम के वादे मिलते हैं। मंगल का पिता गूदड़ प्लेग में मरता है और आगे भूंगी भी नहीं रहती। अनाथ मंगल बंगले के बाहर नीम के नीचे कुत्ते टॉमी के साथ रहता है और जूठन खाता है। सुरेश उसे घोड़ा बनाकर मारता है; नौकर पीटते हैं तो वह घर छोड़ देता है, पर भूख उसे रात को वापस ले आती है और वह कुत्ते के साथ जूठन खाता है। यही दूध का दाम है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक के व्यंग्य को पहली पंक्ति में लिखिए: दूध का दाम जूठन में।
- महेशनाथ को खलनायक न कहें; उसकी सहज उपेक्षा ही कहानी का आरोप है।
- टॉमी को प्रतीक बताइए: समाज ने मंगल को जो दरजा दिया, उसका दर्पण।
- अपनी कहानी में किसी पशु या वस्तु को पात्र की सामाजिक स्थिति का आईना बनाइए।
- शीर्षक का अर्थ अंतिम वाक्य में खोलने का अभ्यास कीजिए।
Try it yourself
एक बच्चे की कहानी लिखिए जिसकी माँ ने किसी सम्पन्न घर पर बड़ा उपकार किया था। माँ के बाद उस घर में बच्चे का दरजा दिखाइए, बिना किसी पात्र को क्रूर बनाए, और शीर्षक ऐसा रखिए जिसका असली अर्थ अंतिम पंक्ति में खुले।
Questions
दूध का दाम कहानी का मुख्य विषय क्या है?
छुआछूत और वर्ग-भेद से पैदा कृतघ्नता। जिस भंगिन के दूध पर बाबू का बेटा पला, उसका अपना बेटा उसी घर में कुत्ते के साथ जूठन खाता है।
दूध का दाम शीर्षक का क्या अर्थ है?
यह व्यंग्य है। भूंगी के दूध की कीमत उसके बेटे मंगल को कुत्ते टॉमी के साथ बँटी जूठन के रूप में चुकाई गई।
दूध का दाम कहानी का अंत क्या है?
पिटकर घर छोड़ने के बाद मंगल भूख से रात में लौटता है और नीम के नीचे कुत्ते के साथ फेंकी हुई जूठन खाता है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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