दुःख का अधिकार (Dukh Ka Adhikar) by Yashpal: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 9 स्पर्श
Quick answer: दुःख का अधिकार (Dukh Ka Adhikar) यशपाल की कहानी, कक्षा 9 स्पर्श भाग 1: खरबूज़े बेचने वाली बुढ़िया की पूरी कथा, विषय, शैली और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
बाज़ार के फुटपाथ पर एक बुढ़िया खरबूज़े बेच रही है और रो रही है, और आसपास के दुकानदार उसे इसलिए कोस रहे हैं कि बेटे की मौत के अगले ही दिन वह सौदा करने आ गई। यशपाल की यह कहानी, स्पर्श भाग 1 में संकलित, इसी दृश्य से सवाल उठाती है कि शोक मनाने का अधिकार किसे है।
पाठ का सार
लेखक बाज़ार में एक बुढ़िया को देखते हैं जो खरबूज़ों की डलिया के पास मुँह छिपाकर रो रही है। पूछने पर पता चलता है कि उसका तेईस वर्ष का बेटा भगवाना खेत से खरबूज़े तोड़ते समय साँप के डसने से मर गया। झाड़-फूँक, ओझा और दान में जो था वह चला गया। घर में बहू बुखार में पड़ी है और नाती-पोते भूखे हैं। उनके लिए ही वह अगले दिन खरबूज़े बेचने आई है।
लेखक को एक संभ्रांत महिला की याद आती है जिसका बेटा मरा था; वह ढाई महीने तक पलंग से नहीं उठी, डॉक्टर सिरहाने रहे, और पूरा शहर उसके शोक की प्रशंसा करता रहा। तुलना करते हुए लेखक निष्कर्ष तक पहुँचते हैं कि दुःख मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए। बुढ़िया के पास वह सहूलियत नहीं, इसलिए उसे रोने का अधिकार भी नहीं मिला।
पात्र
बुढ़िया अभाव और शोक दोनों को एक साथ ढोने वाली माँ है। लेखक संवेदनशील पर्यवेक्षक हैं, जो पहले दूरी से देखते और फिर अपने वर्ग-भेद को खुद पर लागू करते हैं। संभ्रांत महिला तुलना के लिए है, उसका शोक सच्चा है पर सुविधा से घिरा।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: वर्ग-भेद, गरीबी में शोक का भी अधिकार न होना, समाज की कठोर नैतिकता।
मेरी टिप्पणी: लेखक शुरू में स्वयं भी बुढ़िया के पास बैठने में झिझकते हैं, क्योंकि उनकी पोशाक उन्हें फुटपाथ पर बैठने की अनुमति नहीं देती। यह आत्म-स्वीकार कहानी का सबसे सख्त क्षण है; समाज की आलोचना करने वाला खुद को उसी समाज का हिस्सा दिखाता है।
लेखक की शैली और शिल्प
यशपाल दो दृश्यों की तुलना से पूरा तर्क खड़ा करते हैं और दोनों के बीच कोई भाषण नहीं देते। भाषा सादी है, बोलचाल के शब्द हैं, संवाद बाज़ार के लोगों के मुँह से आते हैं। कहानीकारों के लिए सीख यह है कि विषमता दिखानी हो तो दो समानांतर चित्र रखो, निष्कर्ष पाठक खुद निकाल लेगा।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- कहानी की तुलना-संरचना (बुढ़िया बनाम संभ्रांत महिला) उत्तर की रीढ़ बनाएँ।
- पोशाक वाला प्रसंग 'लेखक की झिझक' के प्रश्न में लिखें, यह अंक दिलाता है।
- अंतिम वाक्य को कटाक्ष कहें, संदेश नहीं; यशपाल समाधान नहीं देते।
- अपनी कहानी में विषमता दिखाने के लिए दो समानांतर दृश्य रखें और टिप्पणी हटा दें।
- पात्र का दुःख उसकी हरकत से दिखाएँ, जैसे बुढ़िया रोते हुए भी सौदा करती है।
Try it yourself
दो अलग घरों में एक ही दिन एक जैसी हानि होती है। दोनों की प्रतिक्रियाएँ समानांतर दृश्यों में दिखाइए, और अंत में एक ही कटु पंक्ति पर कहानी बंद कीजिए।
Questions
दुःख का अधिकार कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
दुःख हर मनुष्य का है, पर उसे व्यक्त करने की सुविधा और अधिकार समाज वर्ग के अनुसार बाँटता है। गरीब बुढ़िया को बेटे की मृत्यु के अगले दिन रोज़ी कमाने पर ताने मिलते हैं, जबकि संपन्न महिला के शोक की प्रशंसा होती है।
बुढ़िया के बेटे की मृत्यु कैसे हुई?
तेईस वर्ष का भगवाना खेत में खरबूज़े तोड़ते समय साँप के डसने से मर गया; झाड़-फूँक भी काम नहीं आई।
लेखक बुढ़िया के पास क्यों नहीं बैठ पाए?
उनकी पोशाक फुटपाथ पर बैठने की अनुमति नहीं देती थी; लेखक इसके माध्यम से वर्ग-भेद में अपनी भागीदारी स्वीकार करते हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
Enter a Writory story contest
Enter the Writory Short Story Contest and have your own story read and scored out of 100. Entries close 25 November. That first entry makes you a Writorian.