एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा (Everest Meri Shikhar Yatra) by Bachendri Pal: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 9 स्पर्श
Quick answer: एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा (Everest Meri Shikhar Yatra) बचेंद्री पाल का यात्रा-वृत्तांत, कक्षा 9 स्पर्श भाग 1: 1984 अभियान का पूरा सार, हिमपात, शिखर और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
रात के लगभग साढ़े बारह बजे एक ज़ोरदार धमाके के साथ बर्फ़ का विशाल टुकड़ा कैंप पर गिरता है और तंबू के भीतर सो रही पर्वतारोही बर्फ़ में दब जाती है। बचेंद्री पाल, जो कुछ दिन बाद एवरेस्ट पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनेंगी, इसी यात्रा को स्पर्श भाग 1 के इस पाठ में सुनाती हैं।
पाठ का सार
1984 के भारतीय एवरेस्ट अभियान का दल 7 मार्च को दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना होता है। नमचे बाज़ार से लेखिका पहली बार एवरेस्ट देखती हैं। बेस कैंप पहुँचने से पहले ही खुंबू हिमपात के इलाके में एक शेरपा की मृत्यु की खबर मिलती है। अभियान-नेता कर्नल खुल्लर दल को बताते हैं कि जोखिम इसका हिस्सा है।
15-16 मई की रात कैंप तीन पर बर्फ़ का पिंड गिरता है; लेखिका दब जाती हैं, साथी उन्हें खींचकर निकालते हैं, कई घायल होते हैं। साउथ कोल पर वे साथियों के लिए चाय बनाती हैं और सामान ढोकर मदद करती हैं। 23 मई को दोपहर एक बजकर सात मिनट पर वे अंगदोरजी और ल्हाटू के साथ शिखर पर पहुँचती हैं। वे बर्फ़ पर माथा टेकती हैं, दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा वहाँ रख देती हैं। बेस कैंप पर कर्नल खुल्लर उन्हें बधाई देते हैं और कहते हैं कि देश को उन पर गर्व है।
प्रमुख व्यक्ति
बचेंद्री पाल कथावाचक हैं: दृढ़, विनम्र, साथियों की सेवा को अपनी सफलता से ऊपर रखने वाली। कर्नल खुल्लर अभियान-नेता हैं, यथार्थवादी और प्रेरक। अंगदोरजी अनुभवी शेरपा हैं, जिनकी गति और भरोसा शिखर तक ले जाता है।
विषय और संदेश
अपेक्षित बिंदु: लक्ष्य के प्रति समर्पण, मृत्यु के सामने धैर्य, टीम-भावना और नारी-शक्ति।
मेरी टिप्पणी: पाठ का सबसे ज़रूरी वाक्य वह है जहाँ लेखिका शिखर पर पहुँचकर पहला काम पूजा और दूसरा साथियों को याद करना करती हैं, अपने रिकॉर्ड का ज़िक्र सबसे बाद में। सफलता का यह क्रम ही इस वृत्तांत को आत्म-प्रशंसा से बचाता है।
लेखक की शैली और शिल्प
यह डायरी जैसा वृत्तांत है: तारीखें, समय, ऊँचाई, कैंप की संख्या, सब सटीक। वाक्य छोटे और तथ्यपरक हैं, भावना कम शब्दों में आती है, जैसे माथा टेकने के दृश्य में। बर्फ़ के पिंड की रात को लेखिका नाटकीय नहीं बनातीं; तथ्य खुद डराते हैं।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- तारीखें याद रखें: 7 मार्च रवानगी, 15-16 मई की रात हिमपात, 23 मई शिखर।
- कर्नल खुल्लर के 'जोखिम' वाले कथन को धैर्य के प्रश्न में उद्धरण की जगह भावार्थ में लिखें।
- नारी-शक्ति वाले प्रश्न में सेवा-भाव और साहस दोनों का उल्लेख करें।
- अपना वृत्तांत लिखते समय तथ्य सटीक रखें; भावना कम शब्दों में ज़्यादा असर करती है।
- सफलता का दृश्य लिखते हुए पात्र का पहला काम कुछ ऐसा रखें जो उसके चरित्र को बताए, जैसे यहाँ प्रार्थना।
Try it yourself
ऐसी कहानी लिखिए जिसमें पात्र किसी बड़े लक्ष्य से एक रात पहले लगभग मर जाता है, फिर भी आगे बढ़ता है। लक्ष्य पर पहुँचने का दृश्य केवल पाँच पंक्तियों में और बिना किसी विशेषण के लिखिए।
Questions
एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा पाठ का सार क्या है?
बचेंद्री पाल 1984 के भारतीय अभियान के साथ एवरेस्ट पर चढ़ती हैं। कैंप तीन पर बर्फ़ के पिंड से दबने के बाद भी वे आगे बढ़ती हैं और 23 मई को शिखर पर पहुँचकर एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बनती हैं।
बचेंद्री पाल शिखर पर किसके साथ पहुँचीं?
शेरपा अंगदोरजी और ल्हाटू के साथ, 23 मई 1984 को दोपहर एक बजकर सात मिनट पर।
इस पाठ की विधा क्या है?
यह यात्रा-वृत्तांत या संस्मरण है, जिसे लेखिका ने डायरी की तरह तारीखों और तथ्यों के साथ लिखा है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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