जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) by Kamleshwar: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 कृतिका
Quick answer: जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham Ki Naak) कमलेश्वर का व्यंग्य, कक्षा 10 कृतिका भाग 2: रानी के आगमन, टूटी नाक और जीवित नाक की पूरी कथा, विषय और प्रश्न-उत्तर।
इंग्लैंड की रानी दिल्ली आ रही हैं और सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इंडिया गेट के पास खड़ी जॉर्ज पंचम की मूर्ति की नाक टूटी हुई है। कमलेश्वर का यह व्यंग्य, कृतिका भाग 2 में संकलित, आज़ाद देश की गुलाम मानसिकता पर नाक के बहाने चोट करता है।
पाठ का सार
रानी एलिज़ाबेथ की भारत यात्रा की तैयारियाँ हैं। अख़बार उनकी पोशाक तक की ख़बरें छाप रहे हैं। तभी पता चलता है कि जॉर्ज पंचम की मूर्ति की नाक नहीं है। घबराए हुक्मरान एक मूर्तिकार को बुलाते हैं। वह वादा करता है कि नाक लगा देगा, बशर्ते उसी पत्थर का पता चले। सरकारी फ़ाइलों में पत्थर का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता।
मूर्तिकार देश भर के संग्रहालय और मूर्तियाँ छान मारता है ताकि किसी राष्ट्र-नायक की नाक उतारकर लगा दे, पर गांधी, नेहरू, सुभाष, भगत सिंह, लक्ष्मीबाई, गुरु गोविंद सिंह, सबकी नाकें जॉर्ज से बड़ी निकलती हैं। 1942 में बिहार में गोली से मारे गए बच्चों की मूर्तियों की नाकें भी बड़ी हैं। अंत में वह सुझाता है कि किसी जीवित भारतीय की नाक लगाई जाए। एक जीवित नाक चुपचाप लगा दी जाती है। रानी के आगमन के दिन अख़बारों में कोई ख़बर, कोई फ़ोटो नहीं छपती।
पात्र
मूर्तिकार अपनी कला पर गर्व करने वाला पर सत्ता का आदेश पालने वाला कारीगर है। हुक्मरान और अफ़सर भयभीत, फ़ाइलों में उलझे, दिखावे को प्रतिष्ठा समझने वाले हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: स्वतंत्र भारत की औपनिवेशिक मानसिकता, नौकरशाही की जड़ता, प्रेस की चापलूसी, और शहीदों के सामने विदेशी शासक की छोटी 'नाक'।
मेरी टिप्पणी: व्यंग्य का सबसे कठोर क्षण बिहार के बच्चों की मूर्तियों वाला है। कमलेश्वर हास्य को वहाँ एक पल रोकते हैं, और पाठक को याद आता है कि इन बच्चों को गोली उसी ताज के नाम पर लगी थी जिसकी मूर्ति की नाक बचाई जा रही है।
लेखक की शैली और शिल्प
कमलेश्वर अतिशयोक्ति को समाचार-भाषा में लपेटते हैं, इसलिए बेतुका भी विश्वसनीय लगता है। पूरी कथा एक खोज की तरह चलती है: पत्थर की, फिर नाक की, और हर विफलता एक और राष्ट्र-नायक का कद बताती है।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- नाक को प्रतिष्ठा का प्रतीक कहकर ही हर उत्तर शुरू करें, तभी व्यंग्य खुलता है।
- नायकों की सूची में बिहार के बच्चों का उल्लेख करें, यही कहानी का भावुक बिंदु है।
- अंतिम दृश्य (खाली अख़बार) की व्याख्या 'मौन ही फ़ैसला' के रूप में करें।
- व्यंग्य में बेतुकी बात को समाचार की भाषा में लिखें, विश्वसनीयता बढ़ती है।
- एक खोज-संरचना बनाएँ जिसमें हर विफलता एक नया अर्थ जोड़े।
Try it yourself
किसी बड़े मेहमान के आने से पहले सरकारी दफ़्तर एक बेतुकी कमी दूर करने में लग जाता है। कहानी समाचार की शैली में लिखिए और अंत उस दिन की खाली ख़बरों से कीजिए।
Questions
जॉर्ज पंचम की नाक कहानी का उद्देश्य क्या है?
स्वतंत्र भारत की उस गुलाम मानसिकता पर व्यंग्य, जो रानी के आगमन पर पूर्व शासक की मूर्ति की नाक बचाने के लिए किसी जीवित भारतीय की नाक तक लगा देती है, जबकि भारतीय नायकों का कद उससे बड़ा है।
मूर्तिकार को नाक के लिए पत्थर क्यों नहीं मिला?
सरकारी फ़ाइलों में मूर्ति के पत्थर का कोई रिकॉर्ड नहीं था, और देश की खदानों में भी वैसा पत्थर नहीं मिला; यह नौकरशाही की लापरवाही पर कटाक्ष है।
अंत में मूर्ति पर कौन-सी नाक लगाई गई?
किसी जीवित भारतीय की नाक, जिसे सूखने से बचाने के लिए पानी का प्रबंध किया गया; इसी शर्म से उस दिन अख़बार खाली रहे।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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