हरिहर काका (Harihar Kaka) by Mithileshwar: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 संचयन
Quick answer: हरिहर काका (Harihar Kaka) मिथिलेश्वर की कहानी, कक्षा 10 संचयन भाग 2: पंद्रह बीघे ज़मीन, भाई और ठाकुरबारी के महंत की पूरी कथा अंत सहित, विषय और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
एक निःसंतान बूढ़े के पास पंद्रह बीघे ज़मीन है, और गाँव के दो सबसे ताक़तवर पक्ष, उसके सगे भाई और ठाकुरबारी का महंत, उसे नहीं, उसकी ज़मीन को चाहते हैं। मिथिलेश्वर की यह कहानी, संचयन भाग 2 में संकलित, इसी खिंचतान की कथा है।
पाठ का सार
कथावाचक के गाँव में हरिहर काका विधुर और निःसंतान हैं, उनके हिस्से पंद्रह बीघे उपजाऊ ज़मीन है। भाइयों के घर में भावजें उनकी उपेक्षा करती हैं। ठाकुरबारी का महंत यह जानकर काका को समझाता है कि ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख दें। भाइयों को खबर लगती है तो वे उन्हें वापस लाकर कुछ दिन आदर करते हैं।
एक रात उसके आदमी काका को उठा ले जाते हैं, बाँधकर पीटते हैं और सादे कागज़ों पर अँगूठे के निशान ले लेते हैं। पुलिस उन्हें छुड़ाती है। घर लौटने पर भाई भी वही करते हैं: ज़मीन अपने नाम लिखवाने के लिए मारपीट और बंदी। पुलिस दखल के बाद काका के पास एक सिपाही का पहरा रहता है। कहानी के अंत में काका चुप हो गए हैं, किसी से बात नहीं करते।
पात्र
हरिहर काका सरल, अनपढ़ और स्नेह के भूखे किसान हैं, जिन्हें अपनी ज़मीन के मूल्य और अपने अकेलेपन का बोध देर से होता है। महंत धर्म की आड़ में संपत्ति हथियाने वाला चतुर व्यक्ति है। भाई और उनके परिवार रिश्ते को हिसाब में बदल देते हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: ग्रामीण समाज में ज़मीन का लालच, धर्म-संस्थाओं का स्वार्थ, वृद्धों की उपेक्षा, और रिश्तों का टूटना।
मेरी टिप्पणी: कहानी सबसे कठोर उस क्षण में है जब भाई और महंत एक जैसे हो जाते हैं। लेखक दोनों पक्षों को समानांतर दृश्यों में एक ही अपराध करते दिखाते हैं, इसलिए पाठक किसी को सही नहीं ठहरा पाता।
लेखक की शैली और शिल्प
मिथिलेश्वर ग्रामीण बिहार की भाषा और परिवेश को ब्योरों से गढ़ते हैं: ठाकुरबारी की आरती, भावजों की थाली, सादे कागज़। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता में, जिसमें 13 वर्ष से ऊपर कोई भी किसी भाषा में भाग लेकर 100 में स्कोर और प्रमाणपत्र पाता है, दो पक्षों को समानांतर दृश्यों में एक जैसा दिखाने की यही तकनीक कथा-संरचना के अंक बढ़ाती है।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
- शब्दार्थ: ठाकुरबारी = गाँव का मंदिर-परिसर; महंत = मंदिर का प्रधान; बीघा = ज़मीन का माप; भावज = भाई की पत्नी; विधुर = जिसकी पत्नी न रहे; अँगूठे का निशान = हस्ताक्षर के स्थान पर छाप; पहरा = निगरानी।
- चरित्र-चित्रण (हरिहर काका): काका निःसंतान विधुर किसान हैं, जिनकी पंद्रह बीघे ज़मीन सबकी नज़र में है। वे सरल और भावुक हैं, थोड़े आदर से पिघल जाते हैं। महंत और भाइयों दोनों की मार खाकर वे समझ जाते हैं कि किसी को उनकी परवाह नहीं। अंत में वे मौन हो जाते हैं। उनका चरित्र उपेक्षित बुज़ुर्ग की त्रासदी और लालच के सामने रिश्तों की हार दिखाता है।
- प्रश्न: महंत काका से ज़मीन क्यों चाहता था? उत्तर: ठाकुरबारी की संपत्ति बढ़ाने के लिए; वह धर्म और परलोक का लालच देकर ज़मीन अपने नियंत्रण में लेना चाहता था।
- प्रश्न: भाइयों का व्यवहार क्यों बदला? उत्तर: महंत के प्रयास की खबर मिलने पर वे डरे कि ज़मीन हाथ से जाएगी, इसलिए पहले आदर दिखाया और बाद में ज़ोर-ज़बरदस्ती की।
- प्रश्न: कहानी के अंत में काका की स्थिति क्या है? उत्तर: पुलिस के पहरे में वे अकेले और मौन हैं; किसी से बात नहीं करते।
- सौ शब्दों में सार: हरिहर काका निःसंतान विधुर हैं, जिनके हिस्से पंद्रह बीघे ज़मीन है। भाइयों के घर में उनकी उपेक्षा होती है। ठाकुरबारी का महंत उन्हें ज़मीन ठाकुरजी के नाम करने के लिए फुसलाता है। भाई खबर पाकर उन्हें वापस लाते हैं और कुछ दिन आदर करते हैं। महंत के आदमी रात में काका को उठा ले जाते हैं, पीटते हैं और सादे कागज़ों पर अँगूठा लगवाते हैं; पुलिस छुड़ाती है। फिर भाई भी मारपीट कर ज़मीन लिखवाने का प्रयास करते हैं। पुलिस के पहरे में काका अकेले और मौन रह जाते हैं। कहानी ज़मीन के लालच में रिश्तों और धर्म दोनों की हार दिखाती है।
What writers can take from this
- दो पक्षों (भाई, महंत) के समानांतर कर्म एक तालिका की तरह लिखें, तुलना-प्रश्न में सीधा अंक।
- पंद्रह बीघे और अँगूठे के निशान दो तथ्य वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में आते हैं।
- वृद्धों की उपेक्षा वाले मूल्यपरक प्रश्न में काका का मौन उदाहरण बनाएँ।
- कहानी में दो विरोधी पक्षों को एक जैसा दिखाकर नैतिक निर्णय पाठक पर छोड़ना सीखें।
- अंत में पात्र को बोलने न दें; उसका मौन ही निर्णय हो।
Try it yourself
एक बुज़ुर्ग के पास कोई ऐसी चीज़ है जिसे दो विरोधी पक्ष चाहते हैं। दोनों पक्षों को बारी-बारी उसके साथ एक जैसा व्यवहार करते दिखाइए, और कहानी उसके मौन पर समाप्त कीजिए।
Questions
हरिहर काका कहानी का सार क्या है?
निःसंतान हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन के लिए उनके भाई और ठाकुरबारी का महंत दोनों उन्हें फुसलाते, फिर पीटते और कागज़ों पर अँगूठा लगवाने की कोशिश करते हैं। पुलिस के पहरे में काका अंत में अकेले और मौन रह जाते हैं।
हरिहर काका के पास कितनी ज़मीन थी?
पंद्रह बीघे उपजाऊ ज़मीन, जो चार भाइयों में उनके हिस्से आई थी।
कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
ज़मीन का लालच रिश्तों और धर्म दोनों को खोखला कर देता है, और उपेक्षित वृद्ध इस लालच का सबसे बड़ा शिकार बनते हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
Enter a Writory story contest
Enter the Writory Short Story Contest and have your own story read and scored out of 100. Entries close 30 November. That first entry makes you a Writorian.