ईदगाह (Idgah) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: प्रेमचंद की ईदगाह (Idgah) का पूरा सार अंत सहित, हामिद, अमीना और चिमटे का अर्थ, पात्र-परिचय, शिल्प, शब्दार्थ और परीक्षा के लिए प्रश्नोत्तर।
ईद की सुबह चार साल का हामिद अपनी पूरी पूँजी, तीन पैसे, मुट्ठी में दबाए ईदगाह की ओर चला जा रहा है, और मेले से जो खरीदकर लौटता है वह लोहे का एक चिमटा है। प्रेमचंद ने यह कहानी 1933 में लिखी; इसका अंग्रेज़ी पृष्ठ भी इस संग्रह में है।
कहानी का सार, अंत सहित
हामिद के अब्बा हैज़े से चल बसे और अम्मी भी नहीं रहीं, पर उसे बताया गया है कि वे अच्छी चीज़ें लाने गए हैं, इसलिए वह सबसे प्रसन्न बच्चा है। दादी अमीना तीन पैसे देकर घबराई घर बैठी रहती है। मेले में महमूद, मोहसिन, नूरे और सम्मी हिंडोले, खिलौनों और मिठाई पर पैसे उड़ाते हैं; हामिद हर चीज़ चाहता है और हर बार मन को समझा लेता है।
लोहे की दूकान पर चिमटा देखकर उसे याद आता है कि दादी रोटियाँ सेंकते हुए रोज़ उँगलियाँ जलाती है। तीन पैसे में चिमटा लेकर वह साथियों की हँसी को बहस में हराता है। घर पर अमीना पहले डाँटती है, फिर हामिद कहता है कि अब तुम्हारी उँगलियाँ नहीं जलेंगी। क्रोध दुआओं में बदल जाता है, और कहानी इस उलटफेर पर बंद होती है कि बालक बूढ़े की भूमिका में आ गया और बूढ़ी बालिका बन गई।
पात्र
बच्चे हँसी सँभालते हैं, दादी दुख, हामिद दोनों।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: निस्वार्थ प्रेम, ग़रीबी में गरिमा, बचपन में ही बड़ा हो जाने की विवशता, और चिमटा केंद्रीय प्रतीक। तीखी बात यह कि प्रेमचंद अभाव को पवित्र नहीं बनाते; मिठाइयाँ सचमुच चमकती हैं और हर इनकार टीस की तरह दर्ज होता है, गुण की तरह नहीं। प्रेम यहाँ इच्छा की बदली हुई दिशा है।
शिल्प: मोड़ कहाँ है
ढाँचा एक दिन की सीधी रेखा है: घर, ईदगाह, मेला, घर। मोड़ लोहे की दूकान पर बिना संगीत के आता है और प्रेरणा भावना से नहीं, जली उँगलियों के ठोस चित्र से जुड़ी है; बच्चों की बहस कहानी को हल्का रखती है ताकि अंत के आँसू खर्च हुए बिना पहुँचें। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता में, जहाँ किसी भी भाषा की कहानी को 100 में स्कोर और प्रमाणपत्र मिलता है, भावनात्मक प्रभाव के अंक ऐसे ही क्षणों से बनते हैं।
परीक्षा के लिए
उत्तर-पुस्तिका के लिए।
What writers can take from this
- परीक्षा में चिमटे को केंद्रीय प्रतीक बताइए: प्रेम जो एक उपयोगी वस्तु में बदल गया।
- अंत की भूमिका-अदला-बदली को प्रेमचंद की समापन-युक्ति के रूप में उद्धृत करें।
- विषय सटीक नाम से लिखें: बाल-मनोविज्ञान, निस्वार्थ प्रेम, ग़रीबी और गरिमा, त्योहार का सामाजिक चित्र।
- अपनी कहानी में त्याग को अमूर्त गुण से नहीं, तवे पर जली उँगलियों जैसे ठोस विवरण से जोड़िए।
- पात्र को सहानुभूति से पहले बहस जीतने दीजिए; हामिद पर कोई रोए, उससे पहले वह चिमटा तर्क से बचा लेता है।
Try it yourself
किसी मेले पर ऐसे बच्चे की कहानी लिखिए जिसके पास लगभग कुछ नहीं है और जो बिक रही सबसे कम उत्सवी चीज़ खरीदता है। कारण अंतिम दृश्य में खुले, और बच्चे की व्याख्या से नहीं, किसी दूसरे पात्र की प्रतिक्रिया से।
Questions
ईदगाह कहानी का मूल विषय क्या है?
अभाव में निस्वार्थ प्रेम। हामिद मेले का हर सुख छोड़कर दादी के लिए चिमटा खरीदता है, और कहानी दिखाती है कि बाल-मन का प्रेम किसी काम की वस्तु में कैसे ढलता है।
ईदगाह के अंत में अमीना क्यों रोती है?
पहले वह लोहे का चिमटा देखकर नाराज़ होती है, पर जब हामिद कहता है कि अब तुम्हारी उँगलियाँ नहीं जलेंगी, तो बच्चे का त्याग उसे भीतर तक भेद देता है और क्रोध दुआओं में बदल जाता है।
ईदगाह कहानी कब लिखी गई?
1933 में, प्रेमचंद के जीवन के अंतिम दौर में। यह उनकी सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली कहानियों में है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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