लखनवी अंदाज़ (Lakhnavi Andaz) by Yashpal: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 क्षितिज
Quick answer: लखनवी अंदाज़ (Lakhnavi Andaz) यशपाल की व्यंग्य कहानी, कक्षा 10 क्षितिज भाग 2: नवाब साहब और खीरे की पूरी कथा, विषय, शैली और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
रेल के सेकंड क्लास डिब्बे में एक नवाब साहब दो खीरे छीलते हैं, नमक-मिर्च लगाते हैं, सूँघते हैं और फाँकें खिड़की से बाहर फेंक देते हैं। यशपाल की यह कहानी, क्षितिज भाग 2 में संकलित, इसी खीरे से नवाबी संस्कृति की परतें उतारती है।
पाठ का सार
लेखक भीड़ से बचने और नई कहानी की कल्पना करने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लेते हैं। डिब्बे में एक लखनवी नवाब पहले से बैठे हैं, जिनके सामने तौलिये पर दो खीरे रखे हैं। दोनों एक-दूसरे को अनदेखा करते हैं। फिर नवाब साहब खीरे निकालते हैं, छीलते हैं, फाँकें काटते हैं और नमक-मिर्च छिड़कते हैं।
नवाब साहब एक-एक फाँक उठाकर सूँघते हैं, और फाँक खिड़की से बाहर फेंक देते हैं। फिर तौलिये से हाथ पोंछकर वे गर्व से लेखक की ओर देखते हैं, जैसे कहना चाहते हों कि खीरा खाना तो हल्के लोगों का काम है, वे उसे सूँघकर तृप्त हो गए। लेखक को अपनी नई कहानी का सूत्र मिल जाता है: यदि खीरे की गंध से पेट भर सकता है, तो बिना पात्र और घटना के भी कहानी लिखी जा सकती है।
पात्र
नवाब साहब पुरानी सामंती शान के अवशेष हैं, जिनके पास हैसियत बची है, साधन नहीं; वे दिखावे को तृप्ति मान लेते हैं। लेखक व्यंग्यकार पर्यवेक्षक हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: सामंती दिखावे और खोखली शान पर व्यंग्य; नई कहानी के सिद्धांत, यानी बिना घटना और पात्र के कहानी, पर लेखक का कटाक्ष।
मेरी टिप्पणी: कहानी दोतरफ़ा वार करती है। नवाब का हास्य साफ़ है, पर लेखक खुद अपनी उस साहित्यिक बहस पर भी हँसते हैं जो कथानक को अनावश्यक बताती है।
लेखक की शैली और शिल्प
पूरी कहानी में लगभग कोई संवाद नहीं; सब कुछ हरकत और लेखक के अनुमान से चलता है। खीरा छीलने का विवरण जितना धीमा और सजावटी है, उतना ही उसका अंत अचानक है, और यही व्यंग्य की लय है। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता, जिसमें 13 वर्ष से ऊपर कोई भी किसी भाषा में भाग लेकर 100 में स्कोर पाता है, ऐसे बिना-संवाद वाले दृश्यों को चरित्र-चित्रण की कसौटी पर प्रायः ऊँचा रखती है।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- खीरे की प्रक्रिया के चरण (धोना, छीलना, काटना, सूँघना, फेंकना) क्रम से लिखें, विवरण-प्रश्न में अंक मिलते हैं।
- व्यंग्य के दो निशाने, नवाबी दिखावा और नई कहानी की बहस, दोनों लिखें।
- 'अंदाज़' शब्द के दोहरे अर्थ पर शीर्षक की सार्थकता का उत्तर बनाएँ।
- बिना संवाद की कहानी लिखने का अभ्यास करें; हरकत ही चरित्र बताए।
- धीमा विवरण और अचानक अंत, इस लय को व्यंग्य में आज़माएँ।
Try it yourself
किसी सार्वजनिक जगह पर दो अजनबी बिना एक शब्द बोले एक-दूसरे को नापते हैं। कहानी में कोई संवाद न हो, सिर्फ़ हरकतें और कथावाचक के अनुमान हों, और अंत में एक अनुमान ग़लत निकले।
Questions
लखनवी अंदाज़ कहानी का उद्देश्य क्या है?
यह खोखली सामंती शान पर व्यंग्य है, जिसमें नवाब साहब खीरे को सूँघकर फेंक देते हैं ताकि खाना उनकी हैसियत के नीचे न लगे। साथ ही यशपाल उस साहित्यिक बहस पर कटाक्ष करते हैं जो बिना घटना और पात्र की कहानी की वकालत करती है।
नवाब साहब ने खीरे क्यों नहीं खाए?
खाना उन्हें साधारण लोगों का काम लगा; उन्होंने गंध से तृप्ति का दिखावा किया, जो उनकी झूठी शान का प्रतीक है।
लखनवी अंदाज़ में लेखक किस विधा पर व्यंग्य करते हैं?
वे 'नई कहानी' की उस धारणा पर व्यंग्य करते हैं कि कहानी के लिए कथानक और पात्र ज़रूरी नहीं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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