ममता (Mamta) by Jaishankar Prasad: सार, पात्र और विषय
Quick answer: जयशंकर प्रसाद की ममता (Mamta) का सार अंत सहित: रोहतास की विधवा ममता, पिता का स्वर्ण, भागे हुए हुमायूँ को आश्रय और सैंतालीस साल बाद अकबर का फ़रमान। विषय, शिल्प, प्रश्नोत्तर।
रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि अपनी विधवा बेटी ममता को स्वर्ण की थैलियाँ देते हैं और वह उन्हें उत्कोच कहकर लौटा देती है; उसी रात दुर्ग शेरशाह की चाल से गिरता है। जयशंकर प्रसाद की यह कहानी इतिहास के हाशिये पर खड़ी एक स्त्री की है।
कहानी का सार, अंत सहित
शेरशाह के सैनिक स्त्रियों की डोलियों में छिपकर रोहतास में घुसते हैं; चूड़ामणि ने इसी सौदे में स्वर्ण पाया था। ममता स्वर्ण अस्वीकार करती है, दुर्ग गिरता है, पिता मारे जाते हैं और वह भागकर काशी के पास गंगा-तट पर एक झोपड़ी में विधवा ब्राह्मणी की तरह रहने लगती है। वर्षों बाद एक तूफ़ानी रात में एक थका मुग़ल, चौसा की हार से भागा हुआ, आश्रय माँगता है।
ममता के मन में मुग़लों के प्रति घृणा है, पिता की मृत्यु का कारण वही हैं, पर वह शरणार्थी को झोपड़ी दे देती है और स्वयं बाहर रात काटती है। सुबह वह यह कहकर चला जाता है कि याद रखेगा। सैंतालीस साल बाद अकबर के आदेश से लोग उसी स्थान पर स्मारक बनाने आते हैं, क्योंकि हुमायूँ ने यह आश्रय याद रखा था। वृद्ध, मरणासन्न ममता यह सुनते हुए प्राण त्याग देती है। झोपड़ी की जगह बादशाह की इमारत उठती है और उसका नाम कहीं नहीं लिखा जाता।
पात्र
एक विधवा, दो बादशाह, सैंतालीस साल।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: मानवता धर्म और शत्रुता से ऊपर है, स्त्री का त्याग, इतिहास में साधारण मनुष्य की गुमनामी, और शीर्षक का अर्थ, ममता यानी करुणा। तीखी बात यह कि कहानी का पुरस्कार भी अपमान है। बादशाह याद रखता है, इमारत बनवाता है, पर वह इमारत ममता की झोपड़ी को मिटाकर खड़ी होती है। प्रसाद दिखाते हैं कि इतिहास कृतज्ञता भी अपने नाम से करता है।
शिल्प: तीन कालखंड
कहानी तीन झटकों में चलती है: रोहतास की रात, गंगा-तट की तूफ़ानी रात, और सैंतालीस साल बाद की सुबह। हर खंड में एक आगंतुक है, स्वर्ण, शरणार्थी, फ़रमान, और ममता हर बार वही रहती है; यही स्थिरता चरित्र है। दूसरी सीख नाम का छिपाना है: शरणार्थी की पहचान देर से मिलती है, इसलिए ममता का निर्णय शुद्ध मानवता का लगता है। पात्र को अच्छाई तब करने दीजिए जब उसे पता न हो कि किसके लिए।
परीक्षा के लिए
आश्रय देने के कारण पर प्रश्न आता है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक को करुणा के अर्थ से जोड़िए और ममता के दो इनकारों, स्वर्ण और घृणा, को उसका चरित्र बताइए।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एक पंक्ति में लिखें: शेरशाह, चौसा की हार, हुमायूँ, अकबर।
- अंत के व्यंग्य को स्पष्ट करें: कृतज्ञता की इमारत झोपड़ी मिटाकर बनती है।
- अपनी कहानी को तीन कालखंडों में बाँटिए और पात्र को हर खंड में वही रहने दीजिए।
- अच्छाई तब कराइए जब पात्र को पता न हो कि वह किसके लिए कर रहा है।
Try it yourself
एक पात्र अपने सबसे बड़े शत्रु पक्ष के किसी अनजान भगोड़े को एक रात की शरण देता है। बरसों बाद उस शरण का बदला किसी ऐसे रूप में आए जो पात्र को सम्मान देते हुए उसका जीवन मिटा दे, और उसका नाम कहीं न लिखा जाए।
Questions
ममता कहानी का मूल संदेश क्या है?
मानवता धर्म और शत्रुता से बड़ी है, और इतिहास साधारण मनुष्य की भलाई को गुमनाम कर देता है। ममता शत्रु मुग़ल को शरण देती है और उसकी झोपड़ी पर बादशाह की इमारत बनती है।
ममता कहानी में ममता ने किसे आश्रय दिया?
चौसा की हार के बाद भागे हुए मुग़ल बादशाह हुमायूँ को, एक तूफ़ानी रात में, यह जानते हुए कि मुग़लों के कारण उसका पिता मरा था।
ममता कहानी के अंत में क्या होता है?
सैंतालीस साल बाद अकबर के फ़रमान से उसी स्थान पर स्मारक बनने आता है और वृद्ध ममता उसी समय प्राण त्याग देती है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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