मंदिर (Mandir) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: प्रेमचंद की मंदिर (Mandir) का सार अंत सहित: सुखिया, उसका बीमार बेटा जियावन, ठाकुरजी का मंदिर, पुजारी की मार और ठंडी हो चुकी देह। विषय, शिल्प, प्रश्नोत्तर।
सुखिया का इकलौता बेटा जियावन बुखार में जल रहा है और जब ओझा-सोखा हार जाते हैं तो वह उसे ठाकुरजी के चरणों में रखने का निश्चय करती है, यह जानते हुए कि मंदिर में उसका प्रवेश वर्जित है। प्रेमचंद की यह कहानी छुआछूत पर उनकी सबसे कटु रचनाओं में है।
कहानी का सार, अंत सहित
सुखिया चमार विधवा है और जियावन उसका सब कुछ। बच्चे का बुखार दिन-दिन बढ़ता है, ओझा झाड़-फूँक करता है, कुछ नहीं होता। पड़ोसिनें कहती हैं कि ठाकुरजी के चरणों में रख दो, वहीं आस है। सुखिया दिन में मंदिर जाती है तो पुजारी उसे दूर से ही डाँटकर भगा देता है; चमारिन का मंदिर में क्या काम।
रात को वह बच्चे को गोद में लेकर चुपचाप मंदिर पहुँचती है और भीतर घुसकर उसे ठाकुरजी के सामने रखना चाहती है। पुजारी जाग जाता है, शोर होता है, गाँव के लोग जुटते हैं और मंदिर अपवित्र करने के अपराध में सुखिया को घेरकर मारते हैं। वह पिटी हुई, घिसटती हुई, बच्चे को लेकर घर लौटती है। तब तक जियावन की देह ठंडी हो चुकी है। जिस भगवान के दर तक वह उसे ले गई थी, वहाँ माँ को मार मिली और बेटे को मृत्यु।
पात्र
एक माँ, एक बच्चा, और एक बंद द्वार।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: छुआछूत की क्रूरता, धर्म की पवित्रता बनाम मानवता, माँ की ममता, और ईश्वर पर सवर्णों का एकाधिकार। तीखी बात यह कि सुखिया विद्रोही नहीं है, भक्त है। वह मंदिर को चुनौती देने नहीं, आस लेकर जाती है, और यही उसकी त्रासदी को गहरा करता है: व्यवस्था उसे तब भी नहीं बख़्शती जब वह झुककर आती है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि जिस भगवान को सबका कहा जाता है, उसके द्वार पर पहरा जाति का है।
शिल्प: द्वार तक दो यात्राएँ
सुखिया मंदिर दो बार जाती है, दिन में खुलेआम और रात में छिपकर, और दोनों बार लौटाई जाती है; दोहराव पाठक को बताता है कि रास्ता कोई नहीं था। दूसरी सीख अंत की संक्षिप्ति है: प्रेमचंद बच्चे की मृत्यु पर एक वाक्य से अधिक नहीं देते और न ही कोई टिप्पणी। ठंडी देह अपने आप बोलती है। अपनी कहानी में सबसे बड़े दुख को सबसे कम शब्द दीजिए।
परीक्षा के लिए
शीर्षक के व्यंग्य पर प्रश्न आता है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक का व्यंग्य लिखें: सबका भगवान, बंद द्वार।
- सुखिया को विद्रोही नहीं, भक्त बताइए; इसी से त्रासदी गहरी होती है।
- दो यात्राओं के दोहराव को संरचना का हिस्सा कहें।
- अपनी कहानी में सबसे बड़े दुख को सबसे कम शब्द दीजिए।
- व्यवस्था की क्रूरता उस पात्र पर दिखाइए जो झुककर आता है, लड़कर नहीं।
Try it yourself
एक पात्र अपने सबसे प्रिय व्यक्ति को बचाने के लिए उस जगह जाता है जो उसके लिए वर्जित है, चुनौती देने नहीं, आस लेकर। दो प्रयास लिखिए, दिन का और रात का, और अंत का दुख एक ही वाक्य में रखिए।
Questions
मंदिर कहानी का मूल विषय क्या है?
छुआछूत और धर्म के नाम पर क्रूरता। एक चमार माँ बीमार बेटे को ठाकुरजी के चरणों में रखने जाती है और मंदिर अपवित्र करने के अपराध में मारी जाती है।
मंदिर कहानी के अंत में क्या होता है?
मार खाकर घर लौटी सुखिया का बेटा जियावन तब तक मर चुका होता है; उसकी देह ठंडी हो चुकी है।
मंदिर कहानी में सुखिया कौन है?
एक चमार विधवा, जिसका इकलौता बेटा जियावन बुखार से बीमार है और जो उसे बचाने के लिए वर्जित मंदिर तक जाती है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
Enter a Writory story contest
Enter the Writory Short Story Contest and have your own story read and scored out of 100. Entries close 25 November. That first entry makes you a Writorian.