मंत्र (Mantra) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: प्रेमचंद की मंत्र (Mantra) का सार अंत सहित: डॉक्टर चड्ढा, बूढ़ा भगत, गोल्फ़ का समय, साँप का दंश और बिना नाम बताए किया गया उपचार। विषय, शिल्प और प्रश्नोत्तर।
शाम को गोल्फ़ के लिए निकलते डॉक्टर चड्ढा एक बूढ़े के बीमार बेटे को देखने से इनकार कर देते हैं और बच्चा मर जाता है; वर्षों बाद उसी बूढ़े को डॉक्टर के अपने बेटे की जान बचाने का मौक़ा मिलता है। प्रेमचंद की यह कहानी क्षमा पर हिंदी की सबसे उद्धृत कहानियों में है।
कहानी का सार, अंत सहित
बूढ़ा भगत अपने सात साल के इकलौते बचे बेटे को कई कोस दूर से डॉक्टर चड्ढा के पास लाता है। डॉक्टर गोल्फ़ के लिए निकल रहे हैं और समय बीत चुका है, इसलिए देखने से मना कर देते हैं। बच्चा वहीं मर जाता है और भगत भीतर एक ठंडा घाव पाल लेता है।
वर्षों बाद डॉक्टर के बेटे कैलाश के जन्मदिन पर, मेहमानों के सामने साँपों का खेल दिखाते हुए, एक साँप उसे डस लेता है। बड़े डॉक्टर हार मान लेते हैं। खबर भगत तक पहुँचती है। वह पहले प्रतिशोध के सुख में बैठा रहता है, फिर मन उसे धिक्कारता है और वह रात में कई कोस चलकर बंगले पहुँचता है। घंटों मंत्र पढ़कर वह विष उतार देता है और नाम बताए बिना अँधेरे में चला जाता है। डॉक्टर उसे खोजते रह जाते हैं और उन्हें उस शाम की याद आती है।
पात्र
एक डॉक्टर, एक भगत, और दो बेटे।
- डॉक्टर चड्ढा: कुशल पर अपने समय के ग़ुलाम, जिनका एक इनकार एक बच्चे की जान लेता है।
- भगत: ग़रीब, बूढ़ा, विष उतारने वाला, जिसका बदला क्षमा में बदल जाता है।
- कैलाश: डॉक्टर का बेटा, जिसके शौक से कहानी का दूसरा संकट आता है।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: बदले पर क्षमा की विजय, कर्तव्य में लापरवाही का दंड, धन और ज्ञान के सामने साधारण आदमी की बड़ाई। तीखी बात यह कि भगत तुरंत नहीं जाता; वह पहले बदले का सुख लेता है। प्रेमचंद उसे संत नहीं, संघर्ष करता आदमी बनाते हैं, और उसकी महानता उस संघर्ष को जीतने में है। इसीलिए कहानी उपदेश नहीं लगती।
शिल्प: दो शामें, एक दर्पण
पहली शाम डॉक्टर के पास समय नहीं है और एक बच्चा मरता है; दूसरी रात भगत के पास न आने के सब कारण हैं, और वह आता है। कहानी दोनों को आमने-सामने रखती है और फ़ैसला पाठक पर छोड़ देती है। दूसरी सीख नाम न बताना है: पहचान माँगते ही क्षमा सौदा बन जाती। उदारता को गुमनाम रखिए, तभी वह उदारता रहेगी।
परीक्षा के लिए
भगत के मन के द्वंद्व पर प्रश्न आता है।
- शब्दार्थ: मंत्र (पवित्र शब्द या उपचार का जाप), भगत (भक्त, यहाँ विष उतारने वाला), प्रतिशोध (बदला), दंश (डंक), कोस (दूरी की पुरानी माप), धिक्कार (आत्म-निंदा)।
- चरित्र-चित्रण, भगत: ग़रीब बूढ़ा, जिसके इकलौते बेटे को डॉक्टर ने समय न होने के कारण नहीं देखा और वह मर गया। वर्षों तक वह घाव पाले रहता है और डॉक्टर के बेटे को साँप के डसने की खबर पर पहले बदले का सुख लेता है। पर उसका मन उसे धिक्कारता है और वह रात भर चलकर बच्चे का विष उतारता है, नाम बताए बिना। वह क्षमा की जीत का प्रतीक है।
- प्रश्न: डॉक्टर चड्ढा ने भगत के बेटे को क्यों नहीं देखा? उत्तर: उनके गोल्फ़ का समय हो गया था और वे नियम नहीं तोड़ते थे।
- प्रश्न: कैलाश को क्या हुआ? उत्तर: जन्मदिन पर साँपों का खेल दिखाते हुए एक साँप ने उसे डस लिया।
- प्रश्न: भगत ने नाम क्यों नहीं बताया? उत्तर: वह बदला नहीं, कर्तव्य निभाने आया था; पहचान बताकर उसे सौदा नहीं बनाना चाहता था।
- 100 शब्दों का सार: बूढ़ा भगत अपने बीमार बेटे को दूर से डॉक्टर चड्ढा के पास लाता है, पर डॉक्टर गोल्फ़ का समय होने से उसे नहीं देखते और बच्चा मर जाता है। वर्षों बाद डॉक्टर के बेटे कैलाश को जन्मदिन पर उसका पाला साँप डस लेता है और सब डॉक्टर हार मान लेते हैं। खबर सुनकर भगत पहले बदले के सुख में बैठा रहता है, फिर मन के धिक्कार से रात में कई कोस चलकर बंगले पहुँचता है, घंटों मंत्र पढ़कर विष उतारता है और बिना नाम बताए चला जाता है। डॉक्टर को अपनी पुरानी भूल याद आती है। कहानी बदले पर क्षमा और मानवता की विजय दिखाती है।
What writers can take from this
- परीक्षा में दो शामों की समानांतर संरचना को कहानी की युक्ति बताइए।
- भगत के मन के द्वंद्व को उद्धृत करें; वह संत नहीं, संघर्ष करता आदमी है।
- डॉक्टर के इनकार को कर्तव्य की लापरवाही लिखें, क्रूरता नहीं।
- अपनी कहानी में क्षमा करने वाले पात्र को पहले बदले का सुख लेने दीजिए।
- उदारता को गुमनाम रखिए; पहचान माँगते ही वह सौदा बन जाती है।
Try it yourself
किसी पात्र ने वर्षों पहले एक छोटे इनकार से किसी की बड़ी हानि की थी। अब हानि उठाने वाले के हाथ में उस पात्र का सबसे प्रिय व्यक्ति है। पहले बदले के सुख का दृश्य लिखिए, फिर वह क्षण जब वह मदद करता है और अपना नाम नहीं बताता।
Questions
मंत्र कहानी का मूल संदेश क्या है?
बदले पर क्षमा और मानवता की विजय। जिस डॉक्टर के इनकार से भगत का बेटा मरा, उसी के बेटे का विष भगत रात भर मंत्र पढ़कर उतारता है।
मंत्र कहानी में भगत नाम बताए बिना क्यों चला जाता है?
वह बदला या इनाम नहीं, कर्तव्य निभाने आया था; पहचान बताने से उसकी उदारता सौदा बन जाती।
मंत्र कहानी में डॉक्टर चड्ढा की भूल क्या थी?
उन्होंने गोल्फ़ का समय होने के कारण भगत के बीमार बेटे को देखने से इनकार किया, और बच्चा वहीं मर गया।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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