माता का अँचल (Mata Ka Anchal) by Shivpujan Sahay: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 कृतिका
Quick answer: माता का अँचल (Mata Ka Anchal) शिवपूजन सहाय का उपन्यास-अंश, कक्षा 10 कृतिका भाग 2: भोलानाथ के बचपन की पूरी कथा अंत सहित, विषय, शैली और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
भोर में पिता बच्चे को गोद में उठाकर स्नान कराते हैं, माथे पर त्रिपुंड लगाते हैं और पूजा में साथ बैठाते हैं, फिर भी वही बच्चा साँप देखकर पिता की नहीं, माँ की गोद में जाकर छिपता है। शिवपूजन सहाय के उपन्यास 'देहाती दुनिया' का यह अंश कृतिका भाग 2 में संकलित है।
पाठ का सार
बालक तारकेश्वरनाथ को पिता प्यार से भोलानाथ कहते हैं। वह पिता के साथ सोता है, भोर में उनके साथ स्नान-पूजा करता है, राम-नाम लिखी पर्चियाँ आटे की गोलियों में लपेटकर गंगा की मछलियों को खिलाने जाता है। साथियों के साथ वह बरात निकालने, खेती करने, मिठाई की दुकान लगाने और चबूतरे पर तमाशा करने जैसे खेल खेलता है।
एक दिन बच्चे खेत में चूहे के बिल में पानी डालते हैं और उसमें से साँप निकल आता है। सब भागते हैं, भोलानाथ गिरता-पड़ता घर पहुँचता है। पिता वहीं बैठे हैं, पर वह सीधे माँ के अँचल में छिप जाता है। माँ हल्दी लगाती है, गोद में लेकर पुचकारती है, और पिता के हाथ से लेने के प्रयास पर भी बच्चा माँ का आँचल नहीं छोड़ता।
पात्र
भोलानाथ चंचल, नकलची और साथियों के बीच रमा हुआ बच्चा है। पिता स्नेही और साथी जैसे हैं, धार्मिक अनुष्ठान में भी उसे साथ रखते हैं। माँ पृष्ठभूमि में हैं, पर संकट के क्षण में केंद्र बन जाती हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: बाल-मनोविज्ञान, ग्रामीण जीवन का चित्र, और माँ का अँचल संकट में अंतिम शरण।
मेरी टिप्पणी: पाठ चुपचाप बताता है कि निकटता और सुरक्षा अलग चीज़ें हैं। पिता साथी हैं, खेल में भागीदार, पर भय में बच्चे का शरीर उस ओर मुड़ता है जहाँ उसे पहली बार सँभाला गया। लेखक इसे किसी वाक्य में नहीं कहते, बस साँप और अँचल के बीच की दौड़ दिखाते हैं।
लेखक की शैली और शिल्प
शिवपूजन सहाय की भाषा में देशज शब्द, बच्चों के तुकबंदी वाले गीत और बिहार के गाँव का पूरा शब्द-संसार है। पाठ अधिकतर खेलों के विवरण में जाता है, और यही विवरण अंत के साँप-प्रसंग को अचानक बनाता है।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- पाठ के दो भाग (पिता के साथ दिनचर्या और खेल; साँप-प्रसंग) उत्तर में साफ़ रखें।
- 'देहाती दुनिया' उपन्यास का नाम और तारकेश्वरनाथ असली नाम, दोनों वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में आते हैं।
- बाल-मनोविज्ञान के प्रश्न में नकल के खेलों को उदाहरण बनाएँ।
- अपनी कहानी में लंबे शांत विवरण के बाद एक अचानक घटना रखें; विरोध से प्रभाव बढ़ता है।
- बचपन लिखते समय बच्चों की तुकबंदियाँ और खेल के नाम इस्तेमाल करें, परिवेश खुद बनता है।
Try it yourself
एक बच्चे का पूरा दिन लिखिए जो किसी एक बड़े के साथ बीतता है, और दिन के अंत में अचानक डर के क्षण में वह किसी दूसरे के पास भागता है। दोनों बड़ों की प्रतिक्रिया दिखाइए।
Questions
माता का अँचल पाठ किस उपन्यास से लिया गया है?
यह शिवपूजन सहाय के उपन्यास 'देहाती दुनिया' का अंश है, जिसमें बालक भोलानाथ के बचपन, खेलों और साँप से डरकर माँ के अँचल में छिपने का चित्रण है।
भोलानाथ का असली नाम क्या था?
तारकेश्वरनाथ; पिता उसे प्यार से भोलानाथ कहते थे।
पाठ के अंत में क्या होता है?
चूहे के बिल से साँप निकलने पर भोलानाथ डरकर घर भागता है और पिता के पास बैठे होने पर भी माँ के अँचल में छिप जाता है, जिसे वह पिता के बुलाने पर भी नहीं छोड़ता।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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