मेरे बचपन के दिन (Mere Bachpan Ke Din) by Mahadevi Verma: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 9 क्षितिज
Quick answer: मेरे बचपन के दिन (Mere Bachpan Ke Din) महादेवी वर्मा का संस्मरण, कक्षा 9 क्षितिज भाग 1: पूरा सार, सुभद्रा कुमारी चौहान और गांधीजी का प्रसंग, विषय और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
जिस परिवार में दो सौ वर्षों से कोई लड़की नहीं जन्मी थी, वहाँ एक कन्या का जन्म हुआ और बाबा ने उसे दुर्गा का वरदान मानकर सिर पर बिठाया। महादेवी वर्मा का यह संस्मरण, क्षितिज भाग 1 में संकलित, उसी सौभाग्य और उस युग की लड़कियों के दुर्भाग्य को साथ रखता है।
पाठ का सार
महादेवी बताती हैं कि उनके कुल में लड़कियाँ जन्म लेते ही मार दी जाती थीं, पर बाबा की दुर्गा-पूजा के बाद उनका जन्म हुआ और उन्हें बहुत मान मिला। माँ ने संस्कृत, पंचतंत्र और पूजा-पाठ सिखाया, और माँ का लिखने-गाने का संस्कार उनमें आया। पहले वे ब्रजभाषा में पद रचती थीं। फिर उन्हें इलाहाबाद के क्रॉस्थवेट कॉलेज में भर्ती किया गया।
छात्रावास में सुभद्रा कुमारी चौहान उनसे बड़ी थीं और कविताएँ लिखती थीं। महादेवी चुपके से लिखती थीं, सुभद्रा ने उनकी तलाशी ली और उन्हें खड़ी बोली में लिखने के लिए प्रेरित किया। एक बार महादेवी को पुरस्कार में चाँदी की कटोरी मिली; जब गांधीजी आनंद भवन आए तो उन्होंने वह कटोरी उन्हें भेंट कर दी और गांधीजी ने बिना संकोच ले ली। अंत में महादेवी ज़वारा के नवाब परिवार की पड़ोसी बेगम की याद करती हैं, जिन्हें वे ताई कहती थीं और जिनके बच्चे उनकी माँ को चची जान कहते थे, और आज के सांप्रदायिक माहौल पर दुख जताती हैं।
प्रमुख व्यक्ति
महादेवी स्वयं कथावाचक हैं। बाबा और माँ संस्कार के स्रोत हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान बड़ी सहेली और पहली आलोचक हैं। ज़वारा की बेगम साहिबा सांप्रदायिक सद्भाव की मूर्ति हैं।
विषय और संदेश
परीक्षा में इस पाठ से लड़कियों की स्थिति, शिक्षा का महत्व, साहित्यिक संगति और सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रश्न आते हैं।
मेरी टिप्पणी: पाठ का सबसे साहसी वाक्य वह है जहाँ महादेवी अपने ही जन्म को अपवाद कहती हैं। एक बड़ी कवयित्री अपने सौभाग्य के पीछे खड़ी अनगिनत मारी गई बच्चियों को दिखा देती है, और यही इस संस्मरण को आत्मकथा से ऊपर उठाता है।
लेखक की शैली और शिल्प
महादेवी का गद्य संस्कृतनिष्ठ है पर बहाव सहज। वे घटनाओं को कालक्रम में रखती हैं, हर प्रसंग को एक छोटे चित्र की तरह समेटती हैं और उस पर टिप्पणी बचाकर रखती हैं।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- पाठ के चार पड़ाव (जन्म, माँ का संस्कार, छात्रावास और सुभद्रा, गांधीजी) क्रम में रखें।
- ब्रजभाषा से खड़ी बोली की ओर मुड़ने का प्रसंग 'साहित्यिक प्रभाव' वाले प्रश्न में लिखें।
- सद्भाव वाला अंतिम प्रसंग मूल्यपरक प्रश्नों में सबसे उपयोगी है।
- अपना संस्मरण लिखते समय हर घटना पर टिप्पणी न करें; एक चित्र दें और आगे बढ़ें।
- अंत को वर्तमान से जोड़ें, तभी अतीत पढ़ने लायक बनता है।
Try it yourself
अपने बचपन के उस घर की याद लिखिए जहाँ किसी पड़ोसी परिवार को आपने रिश्तेदार समझा था। बताइए कि वह रिश्ता कैसे बना और आज उसकी याद क्यों टीसती है।
Questions
मेरे बचपन के दिन पाठ में सुभद्रा कुमारी चौहान की क्या भूमिका है?
वे छात्रावास में महादेवी से बड़ी थीं, उनकी छिपी कविताएँ खोजकर उन्हें खड़ी बोली में लिखने के लिए प्रेरित किया और कवि-सम्मेलनों में साथ ले गईं।
महादेवी ने गांधीजी को क्या भेंट किया?
कवि-सम्मेलन में पुरस्कार में मिली चाँदी की कटोरी, जिसे गांधीजी ने स्वीकार कर लिया।
इस पाठ की विधा क्या है?
यह आत्मकथात्मक संस्मरण है, जिसमें लेखिका अपने बचपन और शिक्षा के दिनों को याद करती हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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