नेताजी का चश्मा (Netaji Ka Chashma) by Swayam Prakash: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 10 क्षितिज
Quick answer: नेताजी का चश्मा (Netaji Ka Chashma) स्वयं प्रकाश की कहानी, कक्षा 10 क्षितिज भाग 2: कैप्टन चश्मेवाले की पूरी कथा अंत सहित, विषय, शैली और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
एक कस्बे के चौराहे पर सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति खड़ी है, और हर बार गुज़रने पर उसकी नाक पर अलग फ़्रेम का चश्मा दिखता है। स्वयं प्रकाश की यह कहानी, क्षितिज भाग 2 में संकलित, पूछती है कि देशभक्ति की मूर्ति को आँखें कौन देता है।
पाठ का सार
हालदार साहब हर पंद्रहवें दिन एक कस्बे से गुज़रते हैं। चौराहे पर नगरपालिका ने नेताजी की मूर्ति लगवाई है, जिसे स्थानीय स्कूल के ड्राइंग मास्टर मोतीलाल ने बनाया था। मूर्ति में एक कमी थी: पत्थर का चश्मा नहीं बन पाया, इसलिए किसी ने असली चश्मा पहना दिया। हर बार फ़्रेम बदला होता है। पानवाले से पता चलता है कि यह काम कैप्टन चश्मेवाला करता है, एक गरीब, लँगड़ा फ़ेरीवाला जो ग्राहक की माँग पर मूर्ति का फ़्रेम बदल देता है।
एक दिन मूर्ति की नाक पर कोई चश्मा नहीं। पानवाला बताता है कि कैप्टन मर गया। हालदार साहब आहत होते हैं। अगली बार वहाँ सरकंडे का बना छोटा-सा चश्मा चढ़ा है, जो ज़ाहिर है किसी बच्चे ने बनाया है। हालदार साहब की आँखें भर आती हैं।
पात्र
कैप्टन चश्मेवाला निर्धन, विकलांग फ़ेरीवाला है, जिसे नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के देखना सहन नहीं। हालदार साहब संवेदनशील पर्यवेक्षक हैं। पानवाला कैप्टन का मज़ाक उड़ाता है पर उसकी मृत्यु पर उसका गला भर आता है।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: देशभक्ति किसी पद या शक्ति की नहीं, भावना की चीज़ है;; सरकंडे का चश्मा भावी पीढ़ी में उसी भावना का बचना है।
मेरी टिप्पणी: कहानी का सबसे तीखा वाक्य पानवाले का मज़ाक है कि कैप्टन का फौज से कोई रिश्ता नहीं, वह तो पागल है। कस्बा अपने सबसे सच्चे देशभक्त को हँसी का पात्र समझता है।
लेखक की शैली और शिल्प
स्वयं प्रकाश कहानी को हालदार साहब की बार-बार की यात्राओं से बुनते हैं और चश्मे का बदलना घड़ी की तरह काम करता है। अंत में सरकंडे का चश्मा पूरा संदेश बिना वाक्य के कह देता है। Writory की लघुकथा प्रतियोगिता में ऐसा अंतिम बिंब भावनात्मक प्रभाव के अंकों में सबसे ज़्यादा काम आता है; यहाँ 13 वर्ष से ऊपर कोई भी, किसी भी भाषा में लिखकर, 100 में स्कोर और प्रमाणपत्र पाता है।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- तीन चरण याद रखें: बदलता चश्मा, खाली नाक, सरकंडे का चश्मा; उत्तर इसी क्रम में लिखें।
- पानवाले के मज़ाक और उसकी उदासी दोनों का उल्लेख करें, चरित्र में विरोध ही अंक दिलाता है।
- देशभक्ति को 'साधन नहीं, भावना' वाक्य से परिभाषित करें।
- अपनी कहानी में मुख्य पात्र को दूसरों की बातों से गढ़ें, सीधे कम दिखाएँ; दूरी उसे बड़ा करती है।
- अंतिम वाक्य में व्याख्या न लिखें, एक वस्तु रख दें जो सब कह दे।
Try it yourself
किसी कस्बे में एक ऐसा व्यक्ति है जो रोज़ चुपचाप एक सार्वजनिक चीज़ की देखभाल करता है और लोग उसे पागल कहते हैं। कहानी उसकी मृत्यु के बाद उस चीज़ की हालत से समाप्त हो।
Questions
नेताजी का चश्मा कहानी का सार क्या है?
एक कस्बे में नेताजी की मूर्ति पर कैप्टन नाम का गरीब चश्मेवाला अपनी पेटी से चश्मा चढ़ाता है और बदलता रहता है। उसकी मृत्यु के बाद मूर्ति खाली रहती है, फिर एक बच्चा सरकंडे का चश्मा बना देता है। कहानी सच्ची देशभक्ति और उसके अगली पीढ़ी तक पहुँचने पर है।
कैप्टन चश्मेवाला कौन था?
वह एक बूढ़ा, लँगड़ा और गरीब फ़ेरीवाला था, जिसका फौज से कोई संबंध नहीं था; नेताजी की मूर्ति को चश्मा पहनाने की उसकी भावना के कारण लोग उसे कैप्टन कहते थे।
कहानी के अंत में हालदार साहब की आँखें क्यों भर आईं?
कैप्टन की मृत्यु के बाद उन्हें लगा कि मूर्ति बिना चश्मे रह जाएगी, पर वहाँ किसी बच्चे का बनाया सरकंडे का चश्मा देखकर उन्हें उम्मीद और भावुकता दोनों हुई।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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