पुरस्कार (Puraskar) by Jaishankar Prasad: सार, पात्र और विषय
Quick answer: जयशंकर प्रसाद की पुरस्कार (Puraskar) का सार अंत सहित: मधूलिका, कोसल-नरेश का हल-उत्सव, अरुण का षड्यंत्र, राजभक्ति और प्राणदंड की माँग। विषय, शिल्प, प्रश्नोत्तर।
कोसल के हल-उत्सव में राजा स्वयं जिस खेत पर हल चलाते हैं, वह इस वर्ष सेनापति सिंहमित्र की बेटी मधूलिका का है, और परंपरा के अनुसार वह खेत राज्य का हो जाएगा। जयशंकर प्रसाद की यह कहानी प्रेम और देश के बीच चुनाव की उनकी सबसे प्रसिद्ध कथा है।
कहानी का सार, अंत सहित
राजा मधूलिका को खेत के बदले स्वर्ण देना चाहते हैं, पर वह पूर्वजों की भूमि का मूल्य नहीं लेती और भूमिहीन होकर मेहनत-मज़दूरी से जीने लगती है। वहाँ मगध का युवक अरुण उससे मिलता है और प्रेम करने लगता है। वह उसे कोसल की रानी बनाने का सपना देता है और बताता है कि वह उसी खेत को, जो अब राजा का है, अपने सैनिकों का ठिकाना बनाकर कोसल पर अधिकार करेगा।
मधूलिका अरुण को प्रेम करती है, पर यह देश के विरुद्ध षड्यंत्र है। रात में वह राजा के पास पहुँचती है और सब बता देती है। अरुण और उसके साथी पकड़े जाते हैं और उसे प्राणदंड सुनाया जाता है। राजा मधूलिका को राजभक्ति का पुरस्कार देना चाहते हैं और जो चाहे माँगने को कहते हैं। मधूलिका अरुण की ओर देखती है और कहती है कि उसे भी प्राणदंड मिले। कहानी इसी माँग पर समाप्त होती है।
पात्र
एक स्त्री, दो निष्ठाएँ।
- मधूलिका: सेनापति की बेटी, भूमि का मूल्य न लेने वाली, प्रेम और देश के बीच फँसी।
- अरुण: मगध का युवक, जिसका प्रेम सच्चा है और महत्वाकांक्षा उससे बड़ी।
- कोसल-नरेश: न्यायप्रिय राजा, जिसका पुरस्कार मधूलिका के लिए दंड बन जाता है।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: राजभक्ति और प्रेम का संघर्ष, स्त्री का त्याग, आत्म-सम्मान, और शीर्षक का व्यंग्य, क्योंकि पुरस्कार में मधूलिका मृत्यु माँगती है। तीखी बात यह कि मधूलिका किसी एक पक्ष को नहीं चुनती। वह देश को बचाती है और प्रेमी के साथ मरना चाहती है, यानी दोनों निष्ठाएँ पूरी करती है, और उसकी कीमत खुद चुकाती है। प्रसाद के लिए यह दुविधा का समाधान नहीं, दुविधा की गरिमा है।
शिल्प: उत्सव से अभियोग तक
कहानी हल-उत्सव के उजले दृश्य से शुरू होती है और अंधेरी रात में राजा के सामने समाप्त; बीच में मधूलिका की हर स्थिति, धनी से मज़दूर, प्रेमिका से सूचनादाता, एक सीढ़ी नीचे या भीतर जाती है। दूसरी सीख अंतिम पंक्ति की संक्षिप्ति है: पुरस्कार माँगने के क्षण में एक वाक्य, और कहानी बंद। समाधान की व्याख्या मत कीजिए; पात्र को उसकी माँग कहने दीजिए और रुक जाइए।
परीक्षा के लिए
शीर्षक की सार्थकता पर प्रश्न आता है।
- शब्दार्थ: हल-उत्सव (खेती आरंभ करने का राजकीय पर्व), सेनापति (सेना का प्रधान), षड्यंत्र (साज़िश), राजभक्ति (राज्य के प्रति निष्ठा), प्राणदंड (मृत्युदंड), पुरस्कार (इनाम)।
- चरित्र-चित्रण, मधूलिका: कोसल के सेनापति सिंहमित्र की बेटी, जो पूर्वजों की भूमि का मूल्य लेने से इनकार कर मज़दूरी से जीती है। वह स्वाभिमानी और देशभक्त है; प्रेमी अरुण का षड्यंत्र जानकर राजा को सूचना देती है। पर वह प्रेम से भी नहीं मुकरती और पुरस्कार में अरुण के साथ प्राणदंड माँगती है। वह कर्तव्य और प्रेम दोनों की पूर्णता का प्रतीक है।
- प्रश्न: मधूलिका ने स्वर्ण क्यों नहीं लिया? उत्तर: पूर्वजों की भूमि का मूल्य लेना उसे स्वीकार नहीं था।
- प्रश्न: अरुण की योजना क्या थी? उत्तर: मधूलिका के पुराने खेत को सैनिकों का ठिकाना बनाकर कोसल पर अधिकार करना।
- प्रश्न: मधूलिका ने पुरस्कार में क्या माँगा? उत्तर: अरुण के साथ अपने लिए भी प्राणदंड।
- 100 शब्दों का सार: कोसल के हल-उत्सव में राजा मधूलिका के खेत पर हल चलाते हैं और परंपरा से खेत राज्य का हो जाता है। मधूलिका स्वर्ण लेने से इनकार कर मज़दूरी से जीने लगती है। मगध का युवक अरुण उससे प्रेम करता है और उसे रानी बनाने का सपना दिखाता है, पर उसकी योजना उसी खेत से कोसल पर अधिकार करने की है। मधूलिका प्रेम के बावजूद राजा को सूचना देती है; अरुण पकड़ा जाता है और उसे प्राणदंड मिलता है। राजा पुरस्कार माँगने को कहते हैं और मधूलिका अरुण के साथ अपने लिए भी प्राणदंड माँगती है। कहानी प्रेम और देशभक्ति के संघर्ष में स्त्री के त्याग का चित्र है।
What writers can take from this
- परीक्षा में शीर्षक के व्यंग्य को स्पष्ट लिखें: पुरस्कार में मृत्यु की माँग।
- मधूलिका के दोनों निर्णयों को एक ही चरित्र के दो पक्ष बताइए, विरोध नहीं।
- भूमि का मूल्य न लेने वाले प्रसंग को उसके स्वाभिमान के प्रमाण में उद्धृत करें।
- अपनी कहानी में दुविधा का समाधान मत दीजिए; पात्र को दोनों कीमतें चुकाने दीजिए।
- अंतिम माँग को एक वाक्य में रखिए और उसके बाद कुछ न लिखिए।
Try it yourself
एक पात्र को पता चलता है कि जिसे वह प्रेम करता है, वह उसके देश या समुदाय के विरुद्ध कुछ कर रहा है। उसे दोनों निष्ठाएँ पूरी करने दीजिए, एक को सूचना देकर और दूसरी को साथ खड़े होकर, और कहानी उसकी एक पंक्ति की माँग पर बंद कीजिए।
Questions
पुरस्कार कहानी में मधूलिका ने पुरस्कार में क्या माँगा?
अरुण के साथ अपने लिए भी प्राणदंड। उसने देश के लिए प्रेमी का षड्यंत्र उजागर किया, पर प्रेम से मुकरी नहीं।
पुरस्कार कहानी का मूल संदेश क्या है?
राजभक्ति और प्रेम के संघर्ष में स्त्री का त्याग। मधूलिका देश को बचाती है और प्रेमी के साथ मरना चुनती है, दोनों निष्ठाओं की कीमत खुद चुकाती है।
पुरस्कार कहानी में अरुण कौन है?
मगध का युवक, जो मधूलिका से प्रेम करता है पर उसके पुराने खेत को ठिकाना बनाकर कोसल पर अधिकार करने की योजना बनाता है।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
Enter a Writory story contest
Enter the Writory Short Story Contest and have your own story read and scored out of 100. Entries close 30 November. That first entry makes you a Writorian.