शतरंज के खिलाड़ी (Shatranj Ke Khiladi) by Premchand: सार, पात्र और विषय
Quick answer: शतरंज के खिलाड़ी (Shatranj Ke Khiladi) का सार अंत सहित: मिर्ज़ा सज्जाद अली, मीर रोशन अली, लखनऊ का पतन और बिसात पर दो लाशें। विषय, शिल्प, प्रश्नोत्तर।
वाजिद अली शाह के लखनऊ में मिर्ज़ा सज्जाद अली और मीर रोशन अली सुबह बिसात बिछा लेते हैं और रात तक मोहरे चलते रहते हैं, जबकि बाहर अंग्रेज़ी फ़ौज बढ़ रही है। प्रेमचंद ने यह कहानी 1924 में प्रकाशित की; अंग्रेज़ी में इसका The Chess Players पृष्ठ भी है।
कहानी का सार, अंत सहित
कहानी उस लखनऊ के चित्र से खुलती है जहाँ सब भोग में डूबे हैं। दोनों जागीरदार मिर्ज़ा के दीवानख़ाने में रोज़ जमते हैं। मिर्ज़ा की बेगम त्रस्त होकर एक दिन बिसात उलट देती है, तो खेल मीर के घर चला जाता है, जहाँ बेगम को पति की अनुपस्थिति ही भाती थी। एक दिन बादशाह का सवार मीर को फ़ौज के लिए बुलाने आता है; डरकर दोनों गोमती पार एक वीरान मस्जिद में खेलने लगते हैं।
एक दिन उन्हीं की आँखों के सामने अंग्रेज़ी सेना नवाब को गिरफ़्तार करके ले जाती है। लखनऊ में एक आँसू नहीं गिरता, दोनों देखकर फिर मोहरों में लग जाते हैं। शाम को खेल में झगड़ा होता है: शह, चाल, बेगमों पर ताने, फिर तलवारें, और दोनों वहीं गिर पड़ते हैं। अंतिम छवि: अँधेरा, बिछी बिसात, और लकड़ी के दो बादशाह अपने सिंहासनों पर बैठे मानो इन वीरों की मृत्यु पर रो रहे हों।
पात्र
दो पुरुष जो कुछ नहीं करते और दो स्त्रियाँ जो सब समझती हैं।
विषय और अर्थ
अपेक्षित उत्तर: अवध के सामंती वर्ग का पतन, विलास, कर्तव्य से पलायन और देश की ग़ुलामी के प्रति उदासीनता, जिसका सबसे तीखा चित्र नवाब का क़ैद होकर गुज़रना है। तीखी बात यह कि प्रेमचंद वीरता को उलट देते हैं: दोनों तलवार से बहादुरी से मरते हैं, फिर भी मृत्यु हास्यास्पद है क्योंकि लड़ाई का विषय एक चाल है।
शिल्प: दो समानांतर पटरियाँ
एक पटरी पर इतिहास है, अंग्रेज़ी फ़ौज और नवाब की क़ैद; दूसरी पर बिसात, शह और मात। प्रेमचंद इन्हें अंत तक समानांतर रखते हैं और टकराने नहीं देते; यही समानांतरता व्यंग्य है। दूसरी सीख स्थान-परिवर्तन की है: हर बार खेल वास्तविकता से दूर जाता है। ऐसे ढाँचे पर बनी कहानी Writory की लघुकथा प्रतियोगिता के कथा-संरचना अंकों में ऊँची जाती है, चाहे वह किसी भी भाषा में हो।
परीक्षा के लिए
1856 का अवध-विलय एक पंक्ति में लिखें।
What writers can take from this
- उत्तर में 1856 के अवध-विलय की एक पंक्ति दें, फिर सीधे उदासीनता के विषय पर आएँ।
- अंतिम छवि, बिसात पर बैठे दो बादशाह, को केंद्रीय प्रतीक बताइए।
- दोनों बेगमों को साधारण पात्र न कहें; वे कहानी की एकमात्र विवेकवान आवाज़ें हैं।
- अपनी कहानी में इतिहास को पृष्ठभूमि में चलने दें और अग्रभूमि से कभी टकराने न दें; टकराव न होना ही टिप्पणी है।
- पात्रों को कदम-कदम पर समाज से दूर ले जाइए; अलगाव जितना पूरा, अंत उतना अनिवार्य।
Try it yourself
दो मित्र किसी खेल में इतने डूबे हैं कि उनके शहर की सबसे बड़ी घटना उनके पास से गुज़र जाती है। उस घटना का उल्लेख केवल एक वाक्य में करें और अंत खेल के भीतर से निकालें।
Questions
शतरंज के खिलाड़ी कहानी का उद्देश्य क्या है?
अवध के सामंती वर्ग की विलासिता और देश की ग़ुलामी के प्रति उदासीनता पर व्यंग्य। नवाब की क़ैद पर कोई नहीं रोता, पर एक चाल पर दो लोग जान दे देते हैं।
शतरंज के खिलाड़ी के अंत में क्या होता है?
वीरान मस्जिद में खेलते हुए मीर और मिर्ज़ा एक चाल पर झगड़ते हैं, तलवारें निकालते हैं और दोनों मर जाते हैं।
शतरंज के खिलाड़ी किस काल की कहानी है?
नवाब वाजिद अली शाह के लखनऊ की, 1856 में अंग्रेज़ों द्वारा अवध के विलय के आसपास। प्रेमचंद ने इसे 1924 में प्रकाशित किया।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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