शिरीष के फूल (Shirish Ke Phool) by Hazari Prasad Dwivedi: सार, प्रश्न-उत्तर, कक्षा 12 आरोह
Quick answer: शिरीष के फूल (Shirish Ke Phool) हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध, कक्षा 12 आरोह भाग 2: अवधूत शिरीष, कालिदास और गांधीजी का प्रसंग, पूरा सार और परीक्षा के प्रश्न-उत्तर।
जेठ की दुपहरी में जब धरती जल रही है और पलाश तक झुलस गए हैं, एक पेड़ सिर से पाँव तक फूलों से भरा खड़ा है, बेपरवाह। हजारी प्रसाद द्विवेदी का यह ललित निबंध, आरोह भाग 2 में संकलित, उसी शिरीष को अवधूत कहकर जीवन का पाठ निकालता है।
पाठ का सार
वसंत में फूलने वाला यह वृक्ष जेठ की लू में भी और कभी-कभी आषाढ़ तक फूला रहता है। लेखक इसे अवधूत कहते हैं। इसके फल भी विचित्र हैं: नए फूल आ जाने पर भी पुराने फल डाल पर लटके खड़खड़ाते रहते हैं। लेखक इनकी तुलना उन नेताओं से करते हैं जो नई पीढ़ी के आने पर भी जगह नहीं छोड़ते।
फिर कालिदास आते हैं, जिन्होंने शिरीष को इतना कोमल कहा था कि वह केवल भौंरे के पैर सह सकता है। लेखक कहते हैं कि कालिदास ने फूल की कोमलता देखी, पर उसके फल की कठोरता नहीं; शिरीष कोमल और कठोर दोनों है। अंत में लेखक गांधीजी को याद करते हैं, जो हिंसा और अग्नि के बीच शिरीष की तरह अविचल और कोमल बने रहे। वे प्रश्न के साथ रुकते हैं कि आज वह अवधूत कहाँ है।
प्रमुख संदर्भ
शिरीष केंद्र में है: अवधूत, कोमल-कठोर, कालजयी। कालिदास और वात्स्यायन अनासक्त दृष्टि के उदाहरण हैं। पुराने फल जिद्दी नेताओं का रूपक हैं। गांधीजी निबंध का अंतिम और सबसे बड़ा शिरीष हैं।
विषय और संदेश
अपेक्षित व्याख्या: विषम परिस्थिति में अविचल रहना, कोमलता और कठोरता का संतुलन, अनासक्त दृष्टि, और नेतृत्व में जगह छोड़ने का विवेक।
मेरी टिप्पणी: निबंध का सबसे तीखा हिस्सा फल वाला व्यंग्य है। द्विवेदी अवधूत शिरीष की प्रशंसा करते हुए भी उसके फलों की जिद पर चोट करते हैं, यानी आदर्श वृक्ष भी बेदाग नहीं।
लेखक की शैली और शिल्प
ललित निबंध की विशेषता है कि वह विषय से भटकता हुआ लगता है पर हर मोड़ पर लौटता है; शिरीष से नेता, नेता से कालिदास, कालिदास से गांधी, और हर मोड़ पर वही वृक्ष। भाषा संस्कृतनिष्ठ है, पर बीच में लेखक की हास्य भरी टिप्पणियाँ उसे बोझिल नहीं होने देतीं।
परीक्षा के लिए
संक्षिप्त सामग्री:
What writers can take from this
- निबंध के चार मोड़ (अवधूत, फल-नेता, कालिदास, गांधी) उत्तर में क्रम से लिखें।
- 'कोमल और कठोर दोनों' यह द्वैत हर व्याख्या-प्रश्न का केंद्र है।
- ललित निबंध की परिभाषा और उसकी भटकती-लौटती संरचना एक पंक्ति में बताएँ।
- अपना ललित निबंध किसी एक पेड़ या वस्तु से शुरू करें और हर विषयांतर के बाद उसी पर लौटें।
- आदर्श की प्रशंसा में भी उसकी एक कमी दिखाएँ; चिंतन तभी विश्वसनीय बनता है।
Try it yourself
अपने आसपास के किसी एक पेड़ या पौधे को केंद्र बनाकर ललित निबंध लिखिए, जिसमें आप उससे किसी व्यक्ति या समाज तक जाएँ और हर बार उसी पेड़ पर लौटें। उसकी एक कमी भी ज़रूर लिखें।
Questions
शिरीष के फूल निबंध का मुख्य भाव क्या है?
शिरीष भीषण गर्मी में भी फूला रहता है, इसलिए वह अवधूत की तरह विषम परिस्थिति में अविचल रहने और कोमलता-कठोरता के संतुलन का प्रतीक है; लेखक इसी गुण के कारण उसे गांधीजी से जोड़ते हैं।
लेखक ने शिरीष को अवधूत क्यों कहा?
क्योंकि वह सुख-दुख से निरपेक्ष रहकर जेठ की लू में भी फूलता है और कठिन वातावरण से जीवन-रस खींच लेता है।
शिरीष के फूल किस विधा की रचना है?
यह ललित निबंध है, जिसमें लेखक प्रकृति की एक वस्तु से चलकर साहित्य, राजनीति और इतिहास तक चिंतन करते हैं।
By the Writory editorial team, reviewed by working writers. Updated September 2026.
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