"कारगिल की चोटी से आती पुकार"
by Divyanshcbsbhatnagar
जब-जब तिरंगा लहराता है,
हर दिल गर्व से भर जाता है।
याद आते हैं वो वीर जवान,
जिनसे महका भारत का सम्मान।
बर्फ़ीली चोटियों पर डटे रहे,
हर मुश्किल से लड़ते रहे।
सीने पर गोलियाँ खाकर भी,
"भारत माता की जय" कहते रहे।
माँ की आँखों में आँसू थे,
पर होंठों पर मुस्कान थी।
जानती थी उसका बेटा,
देश की सबसे बड़ी शान थी।
किसी ने अपना बेटा खोया,
किसी ने अपना जीवनसाथी।
फिर भी हर बलिदान ने लिख दी,
भारत की अमर विजय गाथा।
आज जो खुली हवा में साँस लेते हैं,
वो उनकी कुर्बानी का उपहार है।
हमारा हर सुरक्षित कल,
उनके आज का बलिदान है।
आओ इस कारगिल विजय दिवस पर,
एक प्रण हम भी निभाएँ।
देश के वीरों के सम्मान में,
अपने कर्मों से भारत का मान बढ़ाएँ।
सलाम उन अमर शहीदों को,
जिनका ऋण कभी चुका न पाएँगे।
जब तक सूरज-चाँद रहेंगे,
उनके बलिदान के गीत गाएँगे।
जय हिंद।
कारगिल के अमर वीरों को शत-शत नमन।
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